रोगी व उसके तीमारदार से संवाद कर इलाज करें डाक्टर, मिलेगी समाज में ​मान्यता : निदेशक

रोगी व उसके तीमारदार से संवाद कर इलाज करें डाक्टर, मिलेगी समाज में ​मान्यता : निदेशक
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— मेडिकल एथिक्स में दिखे अभूतपूर्व परिवर्तन, रोगी व तीमारदार डाक्टरों का कर रहे गुणगान कानपुर, 20 जून (हि.स.)। डाक्टर्स लोग रात-दिन कार्य करते हैं, फिर भी उनके कार्यों को अपेक्षित लाभ और उसका अपेक्षित परिणाम और समाज में उस प्रकार की मान्यता नहीं मिल पाती, जितनी की उनकी मेहनत और उच्च शिक्षा को देखते हुये मिलनी चाहिए। इसको लेकर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने चिंता जाहिर की और उन्होंने पाया कि डाक्टर का संवाद रोगी और उसके तीमारदारों के बीच न होना प्रमुख कारण है। इसको लेकर पिछले वर्ष मेडिकल एथिक्स पर सेमिनार हर माह में दो बार आयोजित करने का फैसला लिया गया। एक साल में इसके परिणाम अपेक्षा के अनुरुप आये। ऐसे में सभी डाक्टरों को चाहिये कि रोगी व उसके तीमारदार से संवाद कर इलाज करें, समाज में स्वत: मान्यता मिल जाएगी। यह बातें हृदय रोग संस्थान के निदेशक डा. विनय कृष्ण ने कही। रावतपुर स्थित लक्ष्मीपति सिंहानिया हृदय रोग संस्थान में शनिवार देर रात मेडिकल एथिक्स के सेमिनार की श्रंखला का एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वार्षिकोत्सव मनाया गया। रविवार को जानकारी देते हुए संस्थान के निदेशक डा. विनय कृष्ण ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि डाक्टर अपनी पूरी क्षमता व लगन के साथ मरीज का इलाज करता है। इसके बावजूद मरीज के तीमारदार व रिश्तेदार आरोप लगाते हैं कि डाक्टर ने इलाज में लापरवारही बरती और मरीज की मौत हो गई। इससे समाज में डाक्टरों के प्रति नकारात्मक संदेश जा रहा है, जो सदैव चिंता का विषय रहा। इस पर उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने चिंता जाहिर की और उन्होंने पाया कि डाक्टर्स लोग इलाज तो बहुत अच्छे से अच्छा करते हैं परन्तु जो उनको रोगी व रोगी के तीमारदार से इलाज के सम्बन्ध में संवाद करना चाहिए, इलाज के पहले, इलाज के दौरान, इलाज के बाद वो कम्युनिकेशन स्किल डाक्टर्स के अन्दर कमजोर पायी गई। इसी को देखते हुए एक वर्ष पूर्व मंत्री जी के निर्देश पर मेडिकल एथिक्स पर सेमिनार माह में दो बार (प्रथम व तृतीय शनिवार) आयोजित किया जाने लगा। बताया कि एक वर्ष पूरे होने के दौरान अपेक्षा के अनुरुप परिणाम सामने आये और रोगी व उसके तीमारदारों में जो यह मानसिकता बन गई थी कि डाक्टर ने इलाज पर लापरवाही बरती वह दूर हो गई। इसको देखते हुए निदेशक ने सेमिनार में डाक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि इलाज के दौरान व इलाज के बाद अगर आप लोग मरीज और तीमारदारों से संवाद कर इलाज करते रहेंगे तो समाज में आपकी मान्यता स्वत: बढ़ती रहेगी। इससे डाक्टरों के प्रति जो समाज में संदेश जाता रहा कि इलाज में लापरवाही बरती गई है, धीरे—धीरे खत्म हो जाएगी। सेमिनार में अनुभवों को किया गया साझा संस्थान के वरिष्ठ टेक्नीशियन आर सी मिश्रा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि 31 वर्ष के सेवाकाल में वह रोगियों की सेवा करते रहे और रोगियों के रिश्तेदारों को सन्तुष्ट करते रहे, लेकिन कहीं न कहीं डाक्टरों के प्रति नकारात्मक संदेश तीमारदारों में बना रहता था। मेडिकल एथिक्स से एक वर्ष में जो परिणाम सामने आया वह बहुत ही बेहतर रहा। अधिवक्ता मनोज त्रिवेदी जो कि पहले से संस्थान के मरीज हैं ने बताया कि पिछले एक वर्ष में संस्थान की कार्यप्रणाली से काफी प्रभावित हुए हैं। निदेशक ने संदेश दिया कि संस्थान में आने वाला हर एक मरीज चाहे वह किसी भी श्रेणी का हो संस्थान से संतुष्ट होकर ही जाये, ऐसी हमारी इच्छा है और शायद यही इच्छा मंत्री जी भी प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों से रखते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अजय

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