पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को गांवों तक ले जायें : अतुल कोठारी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को गांवों तक ले जायें : अतुल कोठारी
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-मुक्त विवि में दीनदयाल उपाध्याय के पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर आयोजन -पंडित उपाध्याय छोटी उम्र में बहुत कष्ट झेले, लेकिन कभी किसी से कुछ मांगा नहीं: अतुल कोठारी प्रयागराज, 10 फरवरी (हि.स.)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उनका जीवन सादगी पूर्ण तथा कार्य करने की शैली अत्यंत उत्कृष्ट थी। पंडित उपाध्याय का जीवन दर्शन उच्च कोटि का था। वह अपने आचरण से लोगों को सिखाते थे। उक्त विचार शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर श्रद्धासुमन दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सह व्याख्यान में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जैसा उनका नाम था वैसे ही उनके गुण थे। दीन-हीन शोषित पीड़ित व्यक्तियों के लिए वह मसीहा थे। नियम और कानून का जीवन में पूर्ण रुप से पालन करते थे। पंडित उपाध्याय ने छोटी उम्र में बहुत कष्ट झेले लेकिन अपने लिए कभी किसी से कुछ नहीं मांगा। श्री कोठारी ने मुक्त विवि में दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर स्थापित पीठ की सराहना करते हुए कहा कि यह पीठ अच्छे कार्य करने का माध्यम बनेगी। मुक्त विवि इसका प्रारम्भ गोद लिए गांव से कर सकता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को इन गांवों तक ले जायें। उन्होंने मुक्त विवि के कुलपति प्रो.कामेश्वर नाथ सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में मुक्त विवि ने चुनौती को अवसर में बदल दिया। कहा कि पं.दीनदयाल बहुत अच्छे चिंतक, विचारक एवं विद्वान थे। एकात्म मानव दर्शन पर इस पीठ को काम करना चाहिए। एकात्म मानववाद शिक्षा, पर्यावरण एवं समाज के सभी क्षेत्रों पर लागू होता है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय टापू बन कर न रहे। जन सामान्य की हमसे जो अपेक्षाएं हैं, उस पर खरा उतरने का प्रयास करें। समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा को समझना होगा। हर व्यक्ति की भावना का सम्मान होना चाहिए तथा सामूहिकता का भाव होना चाहिए। यही अंत्योदय है, यही दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद का दर्शन है। विषय प्रवर्तन कार्यक्रम संयोजक प्रो.गिरजा शंकर शुक्ला ने तथा आयोजन सचिव डॉ.संजय कुमार सिंह ने अतिथि परिचय एवं संचालन सह सचिव डॉ. सुरेंद्र कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ.अरुण कुमार गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि तथा कुलपति ने दीनदयाल उपाध्याय पुस्तिका का विमोचन भी किया। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त-hindusthansamachar.in