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उत्तर-प्रदेश

विद्यार्थी बोले, किसानों की माली हालत देखकर कृषि कानून बनाए सरकार

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गाजियाबाद, 23 फरवरी (हि.स.)। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस में ‘कृषि कानून’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने इसके पक्ष और विपक्ष में जोरदार तर्क दिए। विद्यार्थियों ने कहा कि किसानों की माली हालत को देखकर ही केंद्र सरकार कानून बनाए। कृषि कानून विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता के विपक्ष में बोलने वाले बीकाॅम द्वितीय वर्ष के छात्र शाकिर चैधरी अव्वल रहे। अंशिता त्रिपाठी दूसरे और सोनम व प्राची शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। विद्यार्थियों ने सुझाव दिए कि कृषि कानून किसानों के हित में है, जिसे लागू किया जाना चाहिए। इस विपक्ष के विद्यार्थियों का मत था कि सरकार किसानों की माली हालत देखकर ही उनके हित में उचित निर्णय लें अन्यथा किसानों को बहुत क्षति हो सकती है। जिसकी भरपाई भविष्य में हो पाना मुश्किल होगा। प्रतियोगिता में कुल 12 प्रतियोगियों की 6 टीमें बनाई गई थीं। मेवाड़ ग्रुप के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि एमएसपी को कृषि कानून में लिखित में शामिल किया जाना चाहिए। सरकार हर जिले में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा किसानों को दे ताकि किसानों को अपनी फसल एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए कोई अतिरिक्त चार्ज न देना पड़े। किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी, इसकी गारंटी भी सरकार को देनी चाहिए। सरकार का दायित्व है कि वह किसानों की हर शंका का निवारण करे। आखिर कृषि हमारे देश की लाइफलाइन है। उन्होंने कृषि कानून की खूबियों पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्अीट्यूशंस की निदेशक डाॅ. अलका अग्रवाल, मेवाड़ लाॅ इंस्टीट्यूट के प्राचार्य डाॅ. आरपी उपाध्याय, शिवशंकर मौर्य, निधि बंसल आदि मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/फरमान

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