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उत्तर-प्रदेश

तनावपूर्ण जीवन शैली, बढ़ती बीमारियों के बीच आयुर्वेद सेे दुनिया ​को नई उम्मीद

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आयुर्वेद ही सुधारेगा दुनियां की सेहत,लोगों की उम्मीद पर खरा—डॉ बी.के.चौरसिया वाराणसी, 21 फरवरी (हि.स.)। भागमभाग तनावपूर्ण जीवन, किडनी,मधुमेह,हार्ट,मोटापा जैसी लगातार बढ़ रही बीमारियों से भारत सहित दुनिया भर में लोग बड़ी संख्या में जान गंवा रहे है। सिर्फ किडनी की बीमारी के आकड़ों पर नजर डाले तो दुनिया भर में 90 करोड़ लोग इससे पीड़ित है। भारत में भी 17 करोड़ से अधिक किडनी के मरीज जीवन से संघर्ष कर रहे है। हर साल तीन से चार लाख मरीज नये सामने आ रहे है। इन बीमारियों के इलाज में अन्य चिकित्सा पद्धतियां पूरी तरह सफल नही हो पा रही। इन बीमारियों का इलाज आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में है। पूरी दुनिया आयुर्वेद की ओर अब उम्मीदों लगाये हुए है। ये उद्गार किडनी विशेषज्ञ,बीके आरोग्यम एंड रिसर्च प्रा.लिमिटेड के निदेशक डॉ बी.के. चौरसिया के है। रविवार को डॉ चौरसिया पराड़कर भवन में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति और दवाओं की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। माना जा रहा है कि आयुर्वेद ही दुनिया की सेहत सुधार सकती है। उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में किडनी के मरीजों का पिछलेे 40 वर्षो से आयुर्वेद पद्धति से सफल इलाज और रोगोें के इलाज के लिए दवाओं के लिए गुणवत्ता परक अनुसंधान को देख प्राइड आफ भारत अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह अवार्ड आयुर्वेद के क्षेत्र में उभरते लोगों को हर साल प्रतिष्ठित संस्थान ट्रेड एंड मीडिया की ओर से दिया जाता है। उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में बिना डायलिसिस केे किडनी का इलाज होता है। यह सब आयुर्वेद के ताकत के चलते हो रहा है। अस्पताल में दुनिया भर से मरीज इलाज के लिए आ रहे है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में अब न्यूरो सम्बधित रोगों का इलाज आयुर्वेद से हो रहा है। इसमें याददास्त बढ़ाने,मिर्गी,चलने फिरने में परेशानी,शरीर में कंपन,मांसपेशियों का कठोर होना,लगातार सिरदर्द,बोलने में अंतर आदि है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आनलाइन और आफलाइन ओपीडी चल रही है। खुद के फार्म हाउस में उगाई गई जड़ी बूटियों से औषधि का निर्माण नागार्जुन पद्धति से होता है। अस्पताल में आयुर्वेद के साथ नेचुरोपैथी से भी असाध्य रोंगों का इलाज होता है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर