दक्षिण कोसल की जनजातियों के भी आराध्य है वैश्विक नायक राम
दक्षिण कोसल की जनजातियों के भी आराध्य है वैश्विक नायक राम
उत्तर-प्रदेश

दक्षिण कोसल की जनजातियों के भी आराध्य है वैश्विक नायक राम

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-दक्षिण कोसल की जनजातीय संस्कृति एवं धार्मिक विश्वास विषय पर हुई वेबिनार लखनऊ, 02 अगस्त (हि.स.)। ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण इंटरनेशनल वेबिनार के 8वें सत्र में दक्षिण कोसल की जनजातीय संस्कृति एवं धार्मिक विश्वास विषय पर रविवार को विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण कोसल की जनजातियों के आराध्य भी वैश्विक नायक राम हैं। दंडकारण्य में राम कथा से जुड़ी अनगिनत जनश्रुतियां, परंपराएं और स्थल आज भी सहज उपलब्ध हैं। वेबिनार के मुख्य अतिथि बस्तर के सांसद मोहन मंडावी थे। वेबिनार के मुख्य वक्ता बस्तर विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ.आनंद मूर्ति मिश्रा ने बताया कि श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान विंध्याचल पर्वत से लेकर गोदावरी तक फैले वन में कई वर्षों तक वास किया था। दंडकारण्य में छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्यों के हिस्से शामिल हैं। उस वन में दरअसल राक्षस दंडक रहा करता था इसलिए उस वन का नाम दंडकारण्य पड़ा। वहां बाली की सेना का आश्रय स्थल भी हुआ करता था। महर्षि अगस्त्य के विंध्य पर्वत पार करने की रोचक कथा भी मिलती है। अगस्त्य आश्रम के साथ ही वहां चिंतालंका जैसे स्थल आज भी वहां मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि छिंदक नागवंश की स्थापना नृपति भूषण ने की थी। छिंदक नागवंश का शासन क्षेत्र बस्तर था। इस क्रम में उन्होंने जनजातीय देवी देवताओं का विस्तार से वर्णन किया जिसमें उन्होंने माता ठाकुरानी के बारे में बताया कि उनका पूजन महामारी से मुक्ति के लिए किया जाता है तो अन्न के लिए भंडारण देवी का पूजन करने की परंपरा है। जंतुओं के देवता के रूप में भैरव पूजे जाते हैं वहीं आखेट तक के देवता हैं। उन्होंने जगार गीतों की मौखिक चली आ रही पारंपरिक के बारे में दिलचस्प जानकारियां दी। अतिथि वक्ता डॉ. नूतन पाण्डेय ने इण्डोनेशिया के जन मन में श्री राम विषय पर अपनी बात कही। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह की परिकल्पना और जगमोहन रावत के तकनीकी संचालन में हुए इस वेबिनार में ग्लोबल इनसायक्लोपीडिया ऑफ रामायण के छत्तीसगढ़ संयोजक इण्डोलॉजिस्ट ललित शर्मा ने सीता की खोज में लंका जाने वाले रामगमन पथ के बारे में विस्तार से बताया जिसमें उन्होंने जटायु, राम, लंका से जुड़े स्थलों की ज्ञानवर्धक जानकारियां दी। इस वेबिनार में सीएसएचडी के सचिव विवेक सक्सेना ने भी अपने विचार रखे। वेबिनार की अध्यक्षता अटल बिहारी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. गौरीदत्त शर्मा ने की तथा वेबीनार का संचालन डॉ. रामकिंकर पाण्डेय ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/राजेश-hindusthansamachar.in