पूर्णबंदी में साफ्टवेयर इंजीनियर बेटी ने नौकरी छोड़ पिता का संभाला कारोबार

पूर्णबंदी में साफ्टवेयर इंजीनियर बेटी ने नौकरी छोड़ पिता का संभाला कारोबार
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पिता के मछली पालन के कारोबार को बढ़ाकर बढ़ाया नाम मीरजापुर, 29 अप्रैल ( हि.स.) । कोविड संकट के कारण तमाम लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, लेकिन अगर कोई हुनरमंद है तो वह बालू से तेल निकालने की कहावत को भी चरितार्थ कर सकता है। पिछले वर्ष कोविड महामारी के कारण पूर्णबंदी में अप्रैल माह में जमालपुर क्षेत्र के लोढ़वां गांव निवासी साफ्टवेयर इंजीनियर नेहा पटेल को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। वह घर वापस लौट आई और पिता के रोजगार में हाथ बंटाने लगी। बिटिया के कठोर परिश्रम के कारण नौकरी जाने का गम अब किसी को भी नहीं है, बल्कि स्वजन उसे वरदान मानने लगे हैं। पिता राजदेव सिंह ने सूखे के कारण हुए जल संकट से निजात पाने के लिए वर्ष 2011 में अपनी चार एकड़ भूमि में तालाब की खोदाई करवाई थी। तालाब में जल भरने के लिए सबमर्सिबल के साथ ही सौर पैनल भी लगवाया। आजीविका के लिए तालाब में वर्ष 2012 से मछली पालन शुरू कर दिया, साथ ही वर्ष 2015 में हैचरी पालन शुरू कर दिया। साफ्टवेयर इंजीनियर नेहा ने वर्ष 2015-19 के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा से बीटेक का कोर्स कर नोएडा में टेन्जेंस ई सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में 3.60 लाख के सालाना पैकेज पर साफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्य को लाॅकडाउन में छोड़ दिया और घर आने के बाद पिता के रोजगार को अपना लिया। इंजीनियर बिटिया ने अपनी दक्षता के बलबूते मत्स्य विभाग मीरजापुर से रि-सर्कुलर एक्टा कल्चर सिस्टम प्रोजेक्ट के तहत पंगास (प्यासी) मछली पालन के लिए 50 लाख रुपये का अनुदान लिया। इस पर सरकार की तरफ से 30 लाख की छूट मिली। तालाब में मछली पालन के लिए 25 गुणा 25 के आठ टैंक का निर्माण कराया। एक टैंक में एक किलो वजन की मछली सात से आठ माह में तीस से पैंतीस कुंतल तैयार हो रही है। नेहा ने बताया कि कम लागत एवं कम एरिया में बायो फिल्टर के माध्यम से अधिक मछली का उत्पादन कर आय के स्रोत में काफी वृद्धि हुई है। पिता के रोजगार को अपना कर काफी गौरवांवित महसूस कर रही हूं। तालाब से जल संरक्षण के संदेश के साथ ही साथ मछली पालन कर परिवार के आय वृद्धि में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। लग रहा मछली आहार प्लांट प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत गांव पर दो करोड़ की लागत से मछली आहार के उत्पादन के लिए टोक्स फिश फीड प्लांट दस हजार वर्ग फीट में लगाया जा रहा है। प्रोजेक्ट के माध्यम से चार एमएम साइज का संतुलित आहार तैयार किया जाएगा जो पानी में डालने पर दस से बारह घंटे तैरता रहेगा। फ्लोटिंग फिश फीड प्रोडक्शन लाइन मशीन 1.20 एक करोड़ रुपये में चीन से मंगाया जा रहा है। एक घंटे में 30 से 40 आहार तैयार होगा और दस से बारह लोगों को आजीविका मिलेगा। साफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उ.प्र. का पहला प्रोजेक्ट है। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर