परमाणु संस्कृत भाषा के दो शब्दों का मेल है : प्रो. पियूष कान्त
परमाणु संस्कृत भाषा के दो शब्दों का मेल है : प्रो. पियूष कान्त
उत्तर-प्रदेश

परमाणु संस्कृत भाषा के दो शब्दों का मेल है : प्रो. पियूष कान्त

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-सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला वाराणसी, 23 जुलाई (हि.स.)। परमाणु संस्कृत भाषा के दो शब्दों का मेल है परम और अणु। परम अर्थात सर्वोत्कृष्ट तथा अणु का सबसे छोटा हिस्सा। अत: परमाणु और अणु का स्थूल रुप से अर्थ एक ही हैं। चूँकि विज्ञान में अणु से लघु, उसके विभाजित अंगों को सम्बोधित किया गया है, इसलिये अविभाज्य परमाणु को अणु से भिन्न समझना गलत नहीं। गुरूवार की शाम ये बातें उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्धार के पूर्व कुलपति प्रो. पियूष कान्त दीक्षित ने कही। अवसर रहा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विज्ञान-अनुसंधान-केंद्रम के तत्वावधान में शाम को आयोजित ऑनलाइन वेद व्याख्यानमाला का। व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. दीक्षित ने कहा कि परमाणु शब्द का मूल अर्थ वह कण जिसे छोटे कणों में न विभाजित किया जा सके। लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों से पता चलता है कि परमाणु विभिन्न अपरमाणुविक कणों से बना है इलेक्ट्रान, प्रोटान और न्यूट्रान एक परमाणु के संघटक कण है। उन्होंने कहा कि वैशेषिक में चार भूतों के चार तरह के परमाणु माने हैं-पृथ्वी परमाणु, जल परमाणु, तेज परमाणु, और वायु परमाणु। पांचवा भूत आकाश विभु है। इससे उसके टुकड़े नहीं जो सकते। प्रो.दीक्षित ने कहा कि न्याय और वैशेषिक के मत से इन्हीं परमाणुओं के संयोग से पृथ्वी आदि द्रव्यों की उत्पत्ति हुई है। जिसका क्रम प्रशस्तपाद भाष्य में निहित है। व्याख्यान माला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि प्राचीन और आधुनिक परम्परा के चिंतक के समन्वय से परमाणु के अन्वेषण पर कार्य होने से एक नवीन ज्ञानराशि प्राप्त होगी। व्याख्यानमाला का संचालन डॉ सत्येंद्र कुमार ,स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो महेंद्र नाथ पांडेय ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/दीपक-hindusthansamachar.in