नई शिक्षा नीति, एक सुनहरे कल की उम्मीद : संजय श्रीवास्तव
नई शिक्षा नीति, एक सुनहरे कल की उम्मीद : संजय श्रीवास्तव
उत्तर-प्रदेश

नई शिक्षा नीति, एक सुनहरे कल की उम्मीद : संजय श्रीवास्तव

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प्रयागराज, 02 अगस्त (हि.स)। नई शिक्षा नीति की आवश्यकता पिछले कई वर्षों से महसूस की जा रही थी। जिसके अंतिम स्वरूप की घोषणा से, सब उत्साहित हैं। हम ज्ञानार्जन की जगह बाजोरोन्मुखी और व्यावसायिक शिक्षा दिलाने वाले मकड़जाल में घिरकर उबर नहीं सके। धीरे-धीरे हम पर थोपी गई यह विवशता हमारी शिक्षा पद्वति को दीमक की तरह चाटती जा रही है। जिसका फायदा मुठ्ठी भर फिरकापरस्त लोग, अपने हित में, शिक्षा का व्यवसायीकरण करके कोचिंग संस्थानों के नाम पर जोंक की तरह जनता का आर्थिक शोषण करते रहे हैं। निश्चय ही, नई शिक्षा नीति के लागू होने पर इसमें विराम लगेगा। यह बातें टैगोर पब्लिक स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक संजय श्रीवास्तव ने रविवार को वार्ता के दौरान बताते हुए कहा कि अपनी रुचि और जरूरतों के अनुसार विषयों का चयन करने का अधिकार, विद्यार्थियों के लिये राहत की खबर है। पहले विद्यार्थियों को कला, वाणिज्य और विज्ञान वर्ग की पढ़ाई के लिए निश्चित विषय समूह को ही चुनना पड़ता था। अब छात्र अपनी रुचि के अनुसार विज्ञान वर्ग के साथ, कला वर्ग या वाणिज्य वर्ग में से किसी भी विषय का चयन कर सकता है। इसका प्रभाव यह पड़ेगा कि उसको कोचिंग संस्थाओं के मकड़जाल में फंसने से मुक्ति मिलेगी। नई शिक्षा नीति, इक्कीसवीं सदी की जरूरत और बहुप्रतीक्षित सुधार है। जिससे लाखों लोगों को अपना जीवन बदलने का पूरा अवसर मिलेगा। एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के तहत संस्कृत सहित सभी स्थानीय भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा में संस्कृत का विकल्प भी मिलेगा। सेकेंडरी स्तर पर कोरियाई, स्पेनिश, पुर्तगाली, फ्रेंच, जर्मन,जापानी और रूसी आदि विदेशी भाषाओं में से चुनने का भी मौका मिलेगा। जिसके कारण छात्रों को रोजगार के अवसर अपने देश के अलावा विदेशों में भी मिलेगा। जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा में लगाने की योजना स्वागत योग्य है, जो आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति की सबसे सराहनीय कदम मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम की खासियत है। नई योजना अनुसार एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री मिल जाएगी। इससे कई उन छात्रों को फायदा मिलेगा, जिनकी पढ़ाई किसी कारण से बीच में छूट जाती है। शोध को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन की स्थापना का प्रस्ताव नवाचार और शोधकर्ताओं के लिए एक वरदान साबित होगा। क्योंकि जो शोध के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम के तहत एक वर्ष का एमए करके सीधे पीएचडी कर सकते हैं। जबकि जो लोग नौकरी करना चाहते हैं उनके लिए तीन साल की डिग्री का ही प्रोग्राम होगा। नई शिक्षा नीति के अमल में तत्परता तभी कारगर होगी, जब राज्य सरकारें भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के निर्माण और उत्थान को ध्यान में रखते हुए इसको संकीर्ण राजनीतिक चश्मे से न देखें। अपितु संसद से मंजूरी मिलने के बाद इसको अपने राज्यों में ईमानदारी से लागू करने का प्रयास होना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त-hindusthansamachar.in