सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में होगा श्रावणी उपाकर्म, प्रात: ऋषि पूजन से शुरुआत
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में होगा श्रावणी उपाकर्म, प्रात: ऋषि पूजन से शुरुआत
उत्तर-प्रदेश

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में होगा श्रावणी उपाकर्म, प्रात: ऋषि पूजन से शुरुआत

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वाराणसी,31 जुलाई (हि.स.)। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में 03 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा पर विधि विधान से श्रावणी उपाकर्म का कार्यक्रम आयोजित है। कोरोना संकट काल को देखते हुए कार्यक्रम का प्रसारण विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज के जरिये किया जायेगा। शुक्रवार की शाम विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजबहादुर ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के कार्यक्रम में प्रात:ऋषि पूजन किया जायेगा। श्रावणी उपाकर्म का अर्थ है आरम्भ करने के लिये नियन्त्रण या निकट लाना। उन्होंने बताया कि वैदिक काल में यह वेदों के अध्ययन के लिये विद्यार्थियों का गुरु के पास एकत्रित होने का काल था। इसके आयोजन काल के बारे में धर्मग्रंथों में लिखा गया है कि जब वनस्पतियां उत्पन्न होती हैं,श्रावण मास के श्रवण व चन्द्र के मिलन(पूर्णिमा)या हस्त नक्षत्र में श्रावण पंचमी को उपाकर्म होता है। इस अध्ययन सत्र का समापन,उत्सर्जन या उत्सर्ग कहलाता था। यह सत्र माघ शुक्ल प्रतिपदा या पौष पूर्णिमा तक चलता था। कुलसचिव ने बताया कि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के शुभ दिन रक्षाबंधन के साथ ही श्रावणी उपाकर्म का पवित्र संयोग बनता है। उन्होने बताया कि भारतीय संस्कृति में द्विजत्व और ब्राहम्णत्व का सम्बंध किसी जाति या वर्ग विशेष में जन्म लेने से नहीं है,बल्कि वह साधना की उच्च कक्षा से जुड़े सम्बोधन हैं। इसलिये संस्कारों से द्विजत्व की प्राप्ति कही जाती रही है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/संजय-hindusthansamachar.in