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उत्तर-प्रदेश

धर्मशाला निर्माण में सेवानिवृत रेलकर्मी ने किया 28 लाख रूपये दान

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मीरजापुर, 02 अप्रैल (हि.स.)। लोग पैसे कमाने के लिए जिंदगी भर मेहनत करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो जीवन भर की कमाई को सामाजिक कार्य में खर्च कर देते हैं। ऐसे ही एक शख्स मीरजापुर, अहरौरा के रवानी टोला निवासी 75 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलकर्मी भोलानाथ ने जीवन भर की कमाई से एक धर्मशाला का निर्माण कराने को सोचा और इसके लिए उन्होंने 28 लाख रूपये दान कर दिये। इससे मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए पक्की छत का सहारा मिलेगा। भोलानाथ को कोई संतान नहीं है। उनकी पत्नी भी अब इस दुनिया में नहीं है। भोलानाथ ने बताया कि जब इस दुनिया में कोई अपना रहा ही नहीं तो वह किसके लिए अपनी पूरी सम्पत्ति छोड़ के जाएं। धर्मशाला बनाने के लिए वह बहुत दिनों से प्रयत्नशील थे लेकिन कोई भरोसेमंद व्यक्ति उन्हें नहीं मिला। अपनी मंशा को उन्होंने चेयरमैन गुलाब मौर्या के समक्ष रखा और धर्मशाला बनाने में मदद मांगी। जनहित से जुड़े कार्य को पूरा करने के लिए चेयरमैन तुरंत तैयार हो गए और दुर्गाजी मंदिर के पास खाली पड़ी जमीन पर धर्मशाला बनाए जाने का कार्य भूमि-पूजन के साथ शुरू हो गया। नगर पालिका परिषद, अहरौरा के चेयरमैन गुलाब मौर्या ने बताया कि सेवानिवृत रेलकर्मी भोलानाथ ने जीवन में कमाए 28 लाख रुपए धर्मशाला बनाने के लिए दान दिया है। दान के पैसों से दुर्गा मंदिर पर भव्य धर्मशाला बनाए जाने का कार्य शुरू हो गया है। सेवानिवृत्त रेलकर्मी भोलानाथ ने अपनी सारी राशि धर्मशाला बनाने के लिए दान दे दी। अब इनका खर्च पेंशन से चल रहा है। उन्होंने कहा कि जीवन में समाज के बारे में भी लोगों को सोचना चाहिए। मेरे माता-पिता भी धार्मिक प्रवृति के थे और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। उनके आदर्शों को देखते हुए धर्मशाला का निर्माण कराने को ठान लिया। भोलानाथ के इस सामाजिक कार्य को क्षेत्र के लोग ही नहीं वरन आसपास के लोग भी सराह रहे हैं। तीन बिस्वा जमीन पर बनेगा धर्मशाला दुर्गा मंदिर परिसर पर स्थित कालीजी मंदिर के पीछे खाली पड़ी तीन बिस्वा जमीन को धर्मशाला बनाने के लिए चयनित किया गया है। इंजीनियर द्वारा धर्मशाला की डिजाइन तैयार कराकर शुक्रवार से श्रीगणेश किया गया। धर्मशाला की डिजाइन में दो हाल, दो कमरा और शौचालय है। इसका इस्तमाल लोग शादी ब्याह के आयोजन में भी कर सकेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त