राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे...के उद्घोष के साथ प्रारंभ हुई थी कासगंज की कारसेवा यात्रा
राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे...के उद्घोष के साथ प्रारंभ हुई थी कासगंज की कारसेवा यात्रा
उत्तर-प्रदेश

राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे...के उद्घोष के साथ प्रारंभ हुई थी कासगंज की कारसेवा यात्रा

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कासगंज, 29 जुलाई (हि.स.)। वर्ष 1990 के अक्टूबर माह की बे काली रातें आज भी राम भक्तों को याद है। जब राम भक्त उद्घोष करते थे कि राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंग...तब तत्कालीन सरकार के निर्देश पर पुलिस उनके पीछे-पीछे लाठी भांजती हुई राम भक्तों को दौड़ाती थी। भगवान राम के भक्ति में ऐसे दीवाने हुए कासगंज के लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए कार सेवा प्रारंभ की। कासगंज से बड़ी संख्या में राम भक्तों की गिरफ्तारियां हुई। इनमें से अधिकांश राम भक्तों को जनपद एटा से चालन कर मैनपुरी जेल भेज दिया गया। चूकि कासगंज सन 1990 में जनपद एटा की तहसील थी। जिला मुख्यालय एटा था, तो समस्त कार्यवाही या जनपद एटा से ही संचालित हुआ करती थी। राम भक्तों का हौसला नहीं टूटा 31 दिनों तक मैनपुरी जेल में रहे। सभी राम भक्तों 13 अक्टूबर 1990 को जेल में दाखिल किए गए। जबकि 14 नवंबर 1990 को इनकी रिहाई सुनिश्चित हुई, लेकिन उनके सर पर राम मंदिर निर्माण का जज्बा सवार ही रहा। राम मंदिर निर्माण के लिए 1990 में कासगंज से प्रारंभ की गई कार्य सेवा का हिस्सा रहे कासगंज के वरिष्ठ व्यापारी नेता अनिल माहेश्वरी का कहना है कि उन दिनों तत्कालीन सरकार ने राम भक्तों पर शिकंजा कस रखा था। जब कारसेवक घर से निकलता था। तब उसके घरवाले काफी चिंतित रहते थे। ऐसा ही कुछ अनिल महेश्वरी के साथ भी हुआ उन्हें शहर के अंबेडकर पार्क के निकट से गिरफ्तार कर 153 ए बी धारा के अंतर्गत पाबंद किया गया। इसके अलावा यही धारा बिलराम गेट से गिरफ्तार कर लगाई गई। इनकी गिरफ्तारी के बाद एटा के न्यायालय में हाजिर किया गया। वहां से मैनपुरी जेल भेज दिया गया 25 दिन तक लगातार जेल यात्रा करने के बाद रिहाई हुई। लेकिन फिर भी उनके मन में राम मंदिर निर्माण की लालसा जागृत रही। इनके साथी कासगंज के रेलवे रोड निवासी सुनील पाटकर एवं योगेंद्र राठी भी जेल में रहे। जेल यात्रा के दौरान रहन-सहन एवं खानपान की भले ही कोई दिक्कत नहीं हुई। लेकिन फिर भी इनके पीछे घरवालों का बुरा हाल था। तब दूरसंचार की व्यवस्थाएं इतनी हाई-फाई नहीं थी। जब कोई आना जाना होता था, तब घर पर खबर कराई जाती थी। कई रातें घर से बाहर सोकर गुजारनी पड़ी राम भक्त अनिल महेश्वरी के मुताबिक उन दिनों माहौल ऐसा था कि घर पर लगातार पुलिस दबिश दे रही थी। पूरे शहर से राम भक्तों को तलाश कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा था। ऐसे में घरों पर सोना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए उन्होंने व उनके साथियों सुनील पाटकर एवं योगेंद्र राठी ने अलग-अलग स्थानों पर परिचितों एवं रिश्तेदारों के यहां रात में सोने का ठिया बनाया। लेकिन फिर भी पुलिस के हत्थे आखिर में चमक ही गये। अयोध्या जाते वक्त कछला पर हुई तलाशी भगवान राम के मंदिर बनाने का जुनून राम भक्तों के सिर पर सवार था कार सेवा जारी थी इस कार्य सेवा में जाने के लिए संघ के निर्देश पर एक लोटा, एक गमछा, भुने हुए चने अपने साथ ले जाना आवश्यक था। इतना सब कुछ सामान एकत्रित कर कासगंज से अनिल माहेश्वरी, सर्वोत्तम शर्मा, मुकेश महेश्वरी, योगेंद्र राठी एवं आदर्श जोहरी एक ही कार में सवार होकर कासगंज से निकले। इन्हें कछला चौकी पर रोक लिया गया। यह इनकी तलाशी हुई संबंधित सामान जप्त कर लिया गया। इसके बाद एक-दो घंटे पुलिस हिरासत में रखा गया। तत्पश्चात रिहा कर दिया गया। इनकी कार की जनपद बदायूं में प्रवेश करते ही पुनः तलाशी हुई। बाद में इन्हें बदायूं से वापस कासगंज भेजा गया। इतनी सख्ती होने के बावजूद भी कासगंज में आंदोलन हुआ और फिर गिरफ्तारियां भी हुई। शहर में निकाली गई राम जी की यात्रा अनिल माहेश्वरी के मुताबिक संघ के निर्देश पर कासगंज के पदाधिकारियों ने भगवान राम जी की शोभायात्रा आंदोलन के दौरान निकाली। इस शोभायात्रा में शामिल झांकी में भगवान राम को कारागार के भीतर बंद दर्शाया गया। घर घर जाकर इस शोभायात्रा के माध्यम से चंदा भी लिया गया। जो बाद में मंदिर निर्माण कोष में जमा किया गया। हिन्दुस्थान समाचार/पुष्पेंद्र/मोहित-hindusthansamachar.in