पद्मश्री प्रोफेसर बृजेश शुक्ला ने ज्योतिर्विज्ञान की वैज्ञानिकता पर डाला प्रकाश
पद्मश्री प्रोफेसर बृजेश शुक्ला ने ज्योतिर्विज्ञान की वैज्ञानिकता पर डाला प्रकाश
उत्तर-प्रदेश

पद्मश्री प्रोफेसर बृजेश शुक्ला ने ज्योतिर्विज्ञान की वैज्ञानिकता पर डाला प्रकाश

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लखनऊ, 17 जुलाई (हि.स.)। संस्कृत तथा प्राकृत भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को समापन हो गया। इस वेबिनार में कोल्हान विश्वविद्यालय, झारखंड के कुलपति प्रोफेसर गंगाधर पंडा एवं शिल्पकार्न यूनिवर्सिटी, बैंकॉक के संस्कृत अध्ययन केंद्र के निर्देशक डॉ सोम्बत् मांगमीसुखश्री विशिष्ट वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए। सभा के प्रारंभ में आयोजक पद्मश्री प्रोफ़ेसर बृजेश कुमार शुक्ला ने ज्योतिर्विज्ञान की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्रहों की कक्षा में चतुर्थ कक्षा के ग्रह के नाम पर उस दिन का नामकरण किया जाता है। अतः आज शुक्रवार ही क्यों है, इसका वैज्ञानिक कारण कालहोरा के सिद्धांत के रूप में ज्योतिष में बताया गया है । राहु को पृथ्वी की छाया मानने का सिद्धांत भास्कराचार्य ने बताया है । भास्कराचार्य ने लीलावती में पाई के स्थूल तथा सुक्ष्म मान पर प्रकाश डाला है । बृहत्संहिता के दकार्गल मैं भूगर्भ विज्ञान के सूत्र विद्यमान है । अनेक जलशिराओं का वर्णन प्रयोग सिद्ध है । परीक्षण नलिका (टेस्ट ट्यूब) से शिशु उत्पादन की विधि भी संस्कृत वाङ्मय में बताया गया है। प्रोफेसर गंगाधर पंडा, कुलपति, कोल्हान विश्वविद्यालय, झारखंड ने वृक्षों वनस्पतियों के भेद प्रभेद पूर्वक उनके विकास के साथ सामुद्रिक शास्त्र में स्त्री पुरुषों के लक्षण, धर्मशास्त्र संस्कारों की विधि तथा काल की वैज्ञानिक प्रक्रिया के साथ उपनयन, कर्णवेध, विवाह आदि संस्कारों की वैज्ञानिक दृष्टि पर प्रकाश डाला। चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से समगोत्र विवाह के निषेध तथा दुष्परिणाम, यज्ञ की वैज्ञानिकता, जठराग्नि की महत्ता, पर्यावरण विज्ञान अवतारों के सिद्धांत से सृष्टि का रहस्य,पंचमहाभूत उनके संरक्षण तथा गॉड पार्टिकल्स के पौराणिक रहस्य ऊपर वैज्ञानिक दृष्टि से प्रकाश डाला । थाईलैंड स्थित शिल्पकार्न यूनिवर्सिटी के संस्कृत अध्ययन केंद्र के निर्देशक प्रोफेसर सोंबत् मांगमीसुखश्री ने आयुर्वेद एवं योग विज्ञान के ऊपर अपना वैदुष्यपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। थाईलैंड में आयुर्वेद का ज्ञान तथा वहां पर उपलब्ध कंबोडिया लिपि में संस्कृत की पांडुलिपियों के बारे में सब को अवगत कराया। आधुनिक कोविड-19 महामारी के उपचार में भारतीय आयुर्वेद ज्ञान का महत्व के ऊपर प्रकाश डाला । संगोष्ठी का संचालक डॉ. अशोक कुमार शतपथी एवं संयोजक डॉ. प्रयाग नारायण मिश्र रहे। हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र/दीपक-hindusthansamachar.in