प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर जीवन में लाया जा सकता है बदलाव : डा. जैनेन्द्र

प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर जीवन में लाया जा सकता है बदलाव : डा. जैनेन्द्र
प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर जीवन में लाया जा सकता है बदलाव : डा. जैनेन्द्र

बलिया, 31 जुलाई (हि. स.)। मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शुक्रवार को साहित्य सदन पुस्तकाल मनियर द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया गया। 'वर्तमान समय और प्रेमचन्द' विषयक वेबिनार में मुख्य वक्ता टीडी कालेज के हिन्दी विभाग के प्रवक्ता व जन नायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. जैनेन्द्र पाण्डेय और डा. अखिलेश राय थे। डा. जैनेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान समय में प्रेमचंद के साहित्य को संवेदनशील होकर सोचने की आवश्यकता है। प्रेमचंद के सम्पूर्ण साहित्य के केंद्र में अंतिम व्यक्ति रहा है। डा. अखिलेश राय ने प्रेमचंद के साहित्य पर अपना दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रेमचंद और भी प्रासंगिक हैं। क्योंकि इसमें आम आदमी का दर्द सबके सामने है, जबकि आम आदमी को वर्तमान साहित्य में उतनी जगह नहीं मिल रही। अज़ीम जी फाउन्डेशन जयपुर के डा. दीपक राय ने विशिष्ट वक्ता के रूप में वर्तमान समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और साहित्यकार की स्थिति पर अपने विचार रखे। इस ऑनलाइन वेबिनार में रणजीत सिंह, अखिलेश कुमार सिन्हा, अजीत कुमार सिंह, उमेश कुमार सिंह आदि ने प्रतिभाग किया। अतिथियों का स्वागत गोपाल जी व आभार सचिव जगदीश जी ने जताया। गोष्ठी का संचालन आशुतोष तोमर ने किया। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/उपेन्द्र-hindusthansamachar.in

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