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उत्तर-प्रदेश

प्रयागराज : कार्यकारिणी की बैठक में गृहकर वृद्धि स्थगित : महापौर

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प्रयागराज, 05 अप्रैल (हि.स.)। पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण गृहकर दरों में वृद्धि को जनता की हितों को ध्यान में रखते हुए स्थगित कर दिया गया था। इस बार भी कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए जनहित में वृद्धि को स्थगित किया गया है। यह निर्णय सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है। यह बातें सोमवार को नगर निगम के कार्यकारिणी कक्ष में महापौर अभिलाषा गुप्ता नन्दी ने पत्रकारों से बताते हुए कहा कि वर्तमान में कोरोना का प्रकोप पुनः दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। नगर निगम द्वारा गृहकर के मासिक किराया दरों में 75 प्रतिशत वृद्धि करने का प्रावधान पूर्व में किया गया था। कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया गया था कि किसी भी दशा में 35 प्रतिशत से अधिक वृद्धि ना की जाए। जबकि वर्तमान में शासन द्वारा जीआईएस सर्वे के लिए निर्धारित एजेंसी द्वारा प्रयागराज नगर निगम सीमा अंतर्गत स्थित भवनों के सर्वे का कार्य आज तक पूर्ण नहीं किया जा सका है। इसके अतिरिक्त नगर निगम प्रयागराज द्वारा कामर्शियल भवनों पर करारोपण का कार्य आज भी पूर्ण रूप से निस्तारित नहीं किया जा सका है। सर्वे का कार्य विस्तारित क्षेत्र सहित पूर्ण किया जाए, सभी भवनों को गृहकर की परिधि में लाते वसूली की जाए। महापौर ने कहा कि प्रयागराज के कुल 80 वार्डों में कुल 2,18,595 मकान हैं। जिसमें 31 मार्च 2021 तक कुल 1,78,072 मकानों से 71 करोड़ 85 लाख प्राप्त हुआ है। जो लक्ष्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि जिनके कर बकाया हैं उनके लिए ब्याज रहित एकमुश्त समाधान योजना के लिए शासन को लिख कर भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही लागू हो जायेगा, जिससे लोगों का सहूलियत मिलेगी। उन्होंने बताया कि 30,426 अनावासीय लोगों में 15,350 लोग गृहकर जमा करते हैं, अन्य लोग नहीं करते जिससे उन पर भार बढ़ रहा है। इस प्रकार कुल मिलाकर 90 हजार लोगों ने अभी तक कर नहीं जमा किया है। उल्लेखनीय है कि अन्य नगर निगम जैसे कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, बरेली तथा मुरादाबाद में भी गृहकर के मासिक किराया दरों में वृद्धि के प्रस्ताव लाए गए थे, जिन्हें कोरोना महामारी के दृष्टिगत स्वीकार नहीं किया गया। हाल ही में नगर निगम ने अपनी राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए हाउस टैक्स की दरों में 75 फीसदी बढ़ाने का निर्णय लिया था। इसे लागू करने के लिए नगर निगम की सदन में भी पास कराया गया। लेकिन भारी जनप्रतिनिधियों और शहरियों के विरोध को देखते हुए महापौर ने कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक में इसे वापस लेने का फैसला किया। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त