सत्यार्थ प्रकाश पढ़कर आजादी के दीवाने हुए थे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल

सत्यार्थ प्रकाश पढ़कर आजादी के दीवाने हुए थे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल
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हमीरपुर, 11 जून (हि.स.)। आर्य समाज सुमेरपुर के सत्संग भवन में आजादी के दीवाने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की 125वीं जयंती शुक्रवार को श्रद्धा पूर्वक मनायी मनाई गई। यज्ञ में आहुतियां देने के बाद उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर वक्ताओं द्वारा विस्तृत प्रकाश डाला गया। रामेश्वर गुप्त ने कहा कि पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में ब्रह्मण परिवार में हुआ था। वह महर्षि दयानन्द के अनन्य भक्त थे। अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश पढ़कर वह आर्य समाज के दीवाने हो गए थे। स्वामी जी की प्रेरणा से उनके अंदर देश भक्ति का जुनून पैदा हो गया था। उन्होंने खुद लिखा था कि सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक से उनका जीवन बदल गया। सार्वदेशिक आर्य वीर दल यूपी के संचालक विवेक आर्य ने बताया कि 1925 में हुए काकोरी कांड में जिन चार लोगों को फांसी की सजा हुई थी। उनमें बिस्मिल भी थे जो गोरखपुर जेल में निरुद्ध थे। उन्होंने मन की लहर पुस्तक में लिखा है, सर फरोसी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बजुए कातिल में है। पंडित बिस्मिल जेल में रहकर प्रतिदिन यज्ञ किया करते थे। जिस दिन उन्हें फांसी दी गई थी। उस दिन भी उन्होंने यज्ञ किया था। आजादी के 20 वर्ष पूर्व 1927 को बिस्मिल के साथ अशफ़ाक उल्ला, रोशन सिंह, राजेन्द्र लाहिणी को भी फांसी दी गई थी। हमे ऐसे देश भक्त से प्रेरणा लेकर देश समाज की सेवा में संलग्न रहना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन आर्य बीर दल के जिला संचालक उमेश आर्य ने किया इस अवसर पर प्रेरित, सुमित, लक्ष्मी नारायण, अमर, गनेश, मनीष, पंकज सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/ पंकज