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उत्तर-प्रदेश

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए गांव-गांव हो रहा 'योग शिविरों' का आयोजन

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- 21 जून को डीआरआई करेगा वर्चुअल माध्यम से योगा आयोजन - निरोगी रहने के लिए नानाजी ने आरोग्यधाम में अलग से तैयार किया था योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकल्प चित्रकूट,16 जून (हि.स.)। पूरी दुनिया में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं पुरातन योग पद्धति को साकार रूप देने के लिये 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए जो स्वरूप तैयार हो रहा है उसमें अब गांव के लोग भी अछूते नहीं है। दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट द्वारा ग्रामीण स्वावलम्बन केन्द्रों पर भी योग की बात पहुंच सके, इसके लिये अपने समाज शिल्पी दम्पति कार्यकर्ताओं के सहयोग से 11 जून से सभी स्वावलंबन केंद्रों पर योगा किया जा रहा है। दीनयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि रोजाना सुबह प्रशिक्षित प्रशिक्षकों द्वारा प्राणायाम, मुद्राभ्यास, सन्धियोग, योगासन और सूर्य नमस्कार की सभी क्रियायें एवं आसन कराये जा रहे हैं। चित्रकूट जनपद तथा मझगवां के स्वावलम्बन केन्द्रों एवं सम्पर्कित ग्रामीण केन्द्रों पर ग्रामवासियों की भागीदारी के साथ योग के इन प्रयोगों को नियमित रूप से अपनाने व दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया गया है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार थे कि भारत को तभी नए सिरे से मजबूत किया जा सकता है, जब व्यक्तित्व निर्माण में योग को नियमित रूप से जोड़ा जाए। योग के माध्यम से एक व्यक्ति को समाज से जोड़ने की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। बताया कि विगत 07 वर्षों से 21 जून को पूरा विश्व योग दिवस के रूप में मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों से योग को विश्व मंच पर पहुंचाने का कार्य हुआ है। इस दृष्टि से चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान एवं सभी मठ-मंदिरों, शैक्षिक एवं सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ता एक साथ सामूहिक रूप से मिलकर 21 जून को योग क्रियाऐं करते हैं। उसके पूर्व नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के कई केंद्रों पर योग का अभ्यास किया जाता है। हर वर्ष सभी संस्थाओं के सामूहिक विचार-विमर्श से अलग-अलग स्थानों पर योग क्रिया की जाती रही हैं। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भारत रत्न नानाजी देशमुख आजीवन स्वास्थ्य की दिशा में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर विशेष जोर देते थे। उनका मानना था कि योग वह किया है, जिसे अपनाकर व्यक्ति जीवन भर निरोगी रह सकता है। इसी दृष्टि से नानाजी ने आरोग्यधाम में अलग से योग प्रकल्प तैयार किया और उसी क्रम में योगाभ्यास का यह आयोजन ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर हो सके, इसके लिए सभी के सार्थक प्रयास इस दिशा में अपेक्षित हैं। श्री महाजन ने बताया कि कोरोना के चलते तात्कालिक हालातों को देखते हुए 21 जून के प्रत्यक्ष रूप से सामूहिक आयोजन को ना करते हुए कोरोना से सम्बंधित शासन के दिशा निर्देशों एवं उससे सुरक्षा सम्बंधी उपायों को ध्यान में रखकर सभी जगह छोटे-छोटे समूह में योग शिविरों का आयोजन किया जाए। उसी के चलते सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान रखते हुए ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर योग शिविर आयोजित करने की योजना बनी है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर वर्चुअल रूप में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रातः 6:00 बजे से 7:00 बजे तक ज्यादा से ज्यादा संख्या में सब इसके साथ जुड़ेंगे, ताकि प्रत्येक घर तक योग का संदेश पहुंचे, और जो योग हमारी प्राचीन जीवनशैली का हिस्सा था, वह फिर से हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल हो सके। हिन्दुस्थान समाचार/ रतन