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उत्तर-प्रदेश

पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेनों को विद्युत इंजन से चलाकर बचाए 585 करोड़ रुपये

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-पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों मंडलों के 70 प्रतिशत रेल ट्रैक का हो चुका विद्युतीकरण लखनऊ, 03 अप्रैल (हि.स.)। पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों मंडलों के लगभग 70 प्रतिशत रेल ट्रैक (नेटवर्क) का विद्युतीकरण हो चुका है। विद्युतीकरण के बाद पूर्वोत्तर रेलवे ने इलेक्ट्रिक (विद्युत) इंजन से ट्रेनें चलाकर 585 करोड़ रुपये की बचत की है। पूर्वोत्तर रेलवे ने कोरोना काल में विपरीत हालातों के दौरान कई उपलब्धियां हासिल कीं हैं। पूर्वोत्तर रेलवे ने तीनों रेल मंडलों के लगभग 70 प्रतिशत रेल ट्रैक का विद्युतीकरण कर लिया है। विद्युतीकरण होने वाले रेल ट्रैक पर तेजी से इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें चलाई जा रही है। पूर्वोत्तर रेलवे ने स्क्रैप निस्तारण में रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित मानक पर सौ फीसदी अंक हासिल कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में 561.36 किलोमीटर रूट का विद्युतीकरण किया गया जो कि भारतीय रेल के लिए एक और बड़ा कीर्तिमान है। एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक दूरी तक कराया गया विद्युतीकरण का कार्य भी पूर्वोत्तर रेलवे की खास उपलब्धियों में से एक है। इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें चलने की वजह से डीजल खपत में काफी कमी आई है। इससे पूर्वोत्तर रेलवे को 585 करोड़ रुपये की बचत हुई। आमान परिवर्तन और दोहरीकरण के क्षेत्र में हुआ बेहतर कार्य पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने वर्ष 2020-21 में आमान परिवर्तन एवं दोहरीकरण का बेहतर कार्य किया है। औड़िहार-गाजीपुर सिटी (40 किलोमीटर), बलिया-फेफना (12.53 किलोमीटर) और कछवा रोड-ज्ञानपुर रोड (48.59 किलोमीटर) पर दोहरीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है। पीलीभीत-शाहजहांपुर और बीसलपुर-शहबाज नगर (42 किलोमीटर) रेल खंड पर आमान परिवर्तन का कार्य इस वित्तीय वर्ष में पूरा किया गया है। अब शहबाज नगर-शाहजहांपुर में सिर्फ 04 किलोमीटर क्षेत्र का कार्य ही शेष बचा है। पूर्वोत्तर रेलवे ने स्क्रैप बेचकर कमाए 229.5 करोड़ रुपये रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2020-21 में पूर्वोत्तर रेलवे को 150 करोड़ रुपये के स्क्रैप बिक्री का लक्ष्य दिया था। पूर्वोत्तर रेलवे ने 229.5 करोड़ रुपये का स्क्रैप बेचकर निर्धारित लक्ष्य से 53 प्रतिशत ज्यादा हासिल किया है जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। पुराने 445 कोचों को बनाया एनएमजी वैगन पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने ऑटोमोबाइल यातायात की मांग को पूरा करने के लिए 445 पुराने आईसीएफ कोचों को न्यूली मोडिफाइड गुड्स (एनएमजी) वैगनों में बदला है। यह भी एक रिकॉर्ड है। पूर्वोत्तर रेलवे ने वर्ष 2020-21 में माल लदान पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक किया है। मालगाड़ियों की औसत गति 25.58 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 46.66 किलोमीटर प्रति घंटे की गई है। लखनऊ के निकट बक्शी का तालाब स्टेशन तथा दूसरा नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवां स्टेशन को ऑटोमोबाइल ट्रैफिक के लिए बेहतर बनाया गया है। छह हजार हॉर्सपावर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन का संचालन शुरू पूर्वोत्तर रेलवे ने पहली बार छह हजार हॉर्सपावर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक इंजन का उपयोग ट्रेनों के संचालन के लिए शुरू कर दिया गया है। उत्कृष्ट एवं आधुनिक तकनीक से बनारस लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा निर्मित इलेक्ट्रिक इंजन यात्री ट्रेनों के संचालन में बहुत उपयोगी है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार ने शनिवार को बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों रेल मंडलों में लगभग 70 प्रतिशत रेल ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है। इस पर विद्युत इंजन से ट्रेनें दौड़ रही हैं। विद्युत इंजन से ट्रेनें चलाकर पूर्वोत्तर रेलवे ने 585 करोड़ रुपये की बचत की है। पूर्वोत्तर रेलवे की लखनऊ मंडल की डीआरएम डॉ. मोनिका अग्निहोत्री ने बताया कि कोरोना काल में लखनऊ मंडल में भी विद्युतीकरण तेजी से हुआ है। तीन फेज वाले इलेक्ट्रिक इंजनों से पूर्वोत्तर रेलवे अब करोड़ों रुपये की बिजली बचा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/ दीपक