मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में कार्रवाई और निवेश बढ़ाने की जरूरत - डॉ. अस्मिता

मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में कार्रवाई और निवेश बढ़ाने की जरूरत - डॉ. अस्मिता
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औरैया, 27 मई (हि.स.)। पुरातनकाल से ही हम मासिक धर्म को लेकर अनेक भ्रांतियों में जकड़े हुये हैं। हमें पता भी नहीं होता कि इन भ्रांतियों के पीछे की क्या वजह है फिर भी हम सारी भ्रांतियों को बखूबी मानते हुये चले आ रहे है। जिससे बहुत सी समस्या हो जाती हैं, लेकिन सबसे पहले माहवारी की समस्या को समझने की शुरुआत अपने घर और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण अपने आपसे होती है। वर्तमान में किशोरियां इस प्रकार की समस्या को किसी से भी साझा नहीं करती है। यह कहना है 100 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अस्मिता का। डॉ. अस्मिता ने बताया कि माहवारी कोई समस्या नहीं, बल्कि एक वरदान है जो आगे जाकर मां बनने का सौभाग्य मिलता हैं। उन्होंने बताया कि माहवारी के दौरान 100 में से 90 लोगों को पेट दर्द कि समस्या होती हैं जो बाद में ठीक भी हो जाती हैं। (10-19 वर्ष) यह अवस्था है जिनमें तेजी के साथ शारीरिक एवं मानसिक बदलाव होने लगते हैं। खासतौर से लड़कियों में पीरियड्स का आना, जो हर महीने आने लगते हैं और उस समय किशोरियों को बहुत सारी समस्याएं जैसे- पेट में दर्द, कमर दर्द, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं घेर लेती हैं। जिस वजह से किशोरियां अपने खान-पान की ध्यान नहीं रखती हैं और धीरे-धीरे एनीमिक होने लगती हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि, स्वच्छता एवं साफ सफाई के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि सबसे पहले अपनी व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासतौर से माहवारी के दौरान साफ-सफाई रखने से कई प्रकार की संक्रमणों से होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता हैं। खान-पान के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि हर महीने जो रक्त शरीर से बाहर निकलता हैं तो उसकी भरपाई आयरन युक्त भोजन से करना चाहिए जैसे- हरी सब्जियां, अंकुरित चना एवं आयरन युक्त गोली आदि द्वारा, ताकि सही पोषण मिल सके और वह एनीमिक होने से बच सकें। माहवारी प्रबंधन पर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 की रिपोर्ट राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत है। महिलाओं की कुल जनसंख्या का 75 प्रतिशत हिस्सा आज भी गांवों में है। इनमें से देश में 48 प्रतिशत व प्रदेश में 40 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं। 44 प्रतिशत महिलाएं यह कहती हैं कि वह अपनी माहवारी प्रबंधन की सामग्री को धोकर पुन: उपयोग करती हैं। यह भी जानें मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की शुरूआत साल 2013 में वॉश (जल स्वच्छता एवं स्वास्थ्य रक्षा) द्वारा की गयी थी और इस दिवस को पहली बार 28 मई 2014 में मनाया गया था। इस बार विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की थीम 'मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में कार्रवाई और निवेश बढ़ाने की जरूरत’ है। आज जब पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण से उपजी जिस कोविड-19 वैश्विक महामारी से जूझ रही है, उसमें इससे बेहतर थीम शायद कोई और नहीं हो सकती थी। हिन्दुस्थान समाचार/ सुनील

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