नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र एवं उप्र को सफलता की नई ऊंचाईयों तक ले जायेगी :डाॅ.सतीश चन्द्र द्विवेदी
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र एवं उप्र को सफलता की नई ऊंचाईयों तक ले जायेगी :डाॅ.सतीश चन्द्र द्विवेदी
उत्तर-प्रदेश

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र एवं उप्र को सफलता की नई ऊंचाईयों तक ले जायेगी :डाॅ.सतीश चन्द्र द्विवेदी

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लखनऊ, 30 जुलाई(हि.स.)। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ. सतीश चन्द्र द्विवेदी ने भारत सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे पर विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के उपरान्त भारत सरकार को सुझाव भेजे गये थे, जिन्हें स्वीकार किया गया है। उन्होंने इसके लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश को एक नई दिशा में सफलता की ऊँचाइयों तक ले जायेगी। डाॅ. द्विवेदी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित विभिन्न आयामों पर उप्र में पूर्व से ही कार्य किया जा रहा है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न घटकों की कार्ययोजना के अनुसार है। उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष ‘स्कूल चलो अभियान' व्यापक स्तर पर संचालित करते हुए 06-14 आयुवर्ग के शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं के नामांकन का लक्ष्य पूर्ण कर लिया गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बुनियादी शिक्षा पर अत्यधिक बल दिया गया है और इसके लिएनेशनल मिशन फॉर फाउंडेशन लिटरेसी ऐण्ड न्यूमेरेसी की घोषणा की गयी है, जो स्वागत योग्य है। बताया कि उप्र में मिशन प्रेरणा में बुनियादी शिक्षा, उपचारात्मक शिक्षा तथा शैक्षणिक सामग्री पर प्रदेश में विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। इस दिशा में शिक्षकों के उपयोगार्थ आधारशिला माड्यूल, ध्यानाकर्षण माड्यूल तथा शिक्षण संग्रह माड्यूल शिक्षाविदों की सहायता से तैयार किये गये हैं और सभी शिक्षकों को उपयोगार्थ उपलब्ध कराये जा रहे हैं। डाॅ. द्विवेदी ने बताया कि इसके अतिरिक्त छात्र-छात्राओं के उपयोगार्थ ग्रेडेड बुक्स, रीडिंग बुक्स, लाइब्रेरी बुक्स, खेलकूद साजसज्जा आदि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश में छात्र-छात्राओं के लर्निंग आउटकम्स में सुधार के लिए विशेष बल दिया जा रहा है। छात्र-छात्राओं के उपलब्धि स्तर के आंकलन हेतु त्रैमासिक परीक्षाएं आयोजित करायी गयी हैं। प्रेरणा लक्ष्यों के सापेक्ष कक्षावार एवं विषयवार छात्र-छात्राओं के लर्निंग आउटकम्स की प्रगति का अनुश्रवण करने के लिए प्रेरणा तालिकाएं सभी कक्षा-कक्षों में चस्पा कराई जा रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि त्रैमासिक परीक्षाओं में प्राप्त परिणामों के आधार पर प्रत्येक छात्र-छात्रा को रिपोर्ट कार्ड वितरित किया जा रहा है और छात्र-छात्रा की प्रगतिअभिभावकों से साझा की गयी है। शैक्षिक रूप से पिछड़ रहे छात्र-छात्राओं के लर्निंग आउटकम्स में वृद्धि लाने के लिए रेमेडियल टीचिंग की व्यवस्था की गयी है और इसके लिए विद्यालय के समय-सारिणी में उपचारात्मक शिक्षण पीरियड सम्मिलित किया गया है। छात्र-छात्राओं के लर्निंग आउटकम्स के स्वतंत्र आंकलन के लिए थर्ड पार्टी एसेसमेन्ट की व्यवस्था भी की गयी है। श्री द्विवेदी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा पूर्व प्राथमिक शिक्षा पर विशेष महत्व दिया जा रहा है। इस संबंध में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् द्वारा पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के लिए लर्निंग आउटकम्स निर्धारित किये जा चुके हैं। समग्र शिक्षा द्वारा आई0सी0डी0एस0 से विचार-विमर्श कर ‘पहल' पुस्तिका विकसित की गयी है। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी केन्द्रों की कार्यकत्रियों एवं विद्यालय के प्रधानाध्यापक के लिए प्रशिक्षण आयोजित कराने की कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है। इसी श्रृंखला में इस वर्ष लर्निंग किट्स तैयार करने की कार्ययोजना है। इन सभी घटकों के आधार पर प्रदेश में बच्चों के लिए ‘स्कूल रेडीनेस‘ की कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया जा रहा है। डाॅ. द्विवेदी यह भी बताया कि 06-14 वर्ष के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए प्रदेश में 'शारदा' कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। आउट ऑफ स्कूल बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाकर उन्हें छह माह का विशेष प्रशिक्षण देकर उनके स्तर के अनुरूप विद्यालय की उपयुक्त कक्षा की मुख्य धारा में सम्मिलित किया जायेगा। इन बच्चों के संबंध में विभिन्न सूचनाएं प्राप्त करने तथा बच्चों की ट्रैकिंग करने हेतु 'शारदा पोर्टल' विकसित करते हुए क्रियाशील बनाया गया है। दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा विस्तृत गाइडलाइन्स जारी की गयी है, जिनके तहत ‘समर्थ' कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत अधिक से अधिक दिव्यांग बच्चों को चिन्हित कर आर.बी.एस.के. के सहयोग से उनका चिकित्सीय परीक्षण तथा विद्यालयों में नामांकित कराये जाने की कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि जेण्डर एजुकेशन को बढ़ावा देने की दिशा में प्रदेश में 350 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का कक्षा-12 तक उच्चीकरण किया जा रहा है जिससे कमजोर वर्गों की बालिकाओं को कक्षा-12 तक की निःशुल्क आवासीय शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जेण्डर एजुकेशन फण्ड स्थापित करने की घोषणा की गयी है जो स्वागत योग्य कदम है। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश-hindusthansamachar.in