नागकुंड में स्नान करने से मिटता है काल सर्प दोष
नागकुंड में स्नान करने से मिटता है काल सर्प दोष
उत्तर-प्रदेश

नागकुंड में स्नान करने से मिटता है काल सर्प दोष

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मीरजापुर, 24 जुलाई (हि.स.)। विन्ध्याचल क्षेत्र के कंतित स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक नागकुंड की कहानी नागवंशी महाराजा दानव से जुड़ी है। मान्यता है कि सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि (नाग पंचमी) पर नागकुंड में स्नान करने से व्यक्ति को सर्पदोष से मुक्ति मिलती है और अक्षय पूण्य के भागी भी बनते हैं। नाकुंड की कहानी लगभग 2200 वर्ष पुरानी है। राजा दानवराज ने नागकुंड का निर्माण कराया। लालभैरव मंदिर के सामने 52 सीढ़ियों का नागकुंड है। प्राचीन कथाओं के मुताबिक नागकुंड में स्नान करने से सर्प दोष समाप्त हो जाता है। कुंड का निर्माण मुगल काल माना जाता है। दंतकथा के अनुसार कुंड निर्माण के समय नागवंशी राजा दानव राज ने अपनी 52 रानियों की मौजूदगी में कुंड का निर्माण कराया। बताया तो यहां तक जाता है कि महाराज दानव की 52 रानियां अलग-अलग सीढ़ियों से कुंड में स्नान करने जाती थी। जानकर बताते है कि 200 वर्ष पहले मां विंध्यवसिनी का दर्शन करने के लिए फर्रे दर्रे से भक्त यहां आते थे। तब आज जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं का अभाव रहा। जो भक्त दर्शन पूजन के लिए आते, वो नागकुंड से भोजन बनाने के लिए बर्तन के लिए प्रार्थना करते। भक्त की पुकार सुनते ही कुंड से बर्तन बाहर आ जाता। भोजन बनाने के बाद भक्त बर्तनों की साफ सफाई करने के बाद बर्तन पुनः कुंड के हवाले कर देते। कुछ समय बाद लोग दूषित मानसिकता के साथ दुरुपयोग करने लगे। इसके बाद बर्तन निकलना बन्द हो गए। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त-hindusthansamachar.in