हमीरपुर : नाग देवता के मंदिर में पूजा करने से काल सर्प दोष से मिलती है निजात
हमीरपुर : नाग देवता के मंदिर में पूजा करने से काल सर्प दोष से मिलती है निजात
उत्तर-प्रदेश

हमीरपुर : नाग देवता के मंदिर में पूजा करने से काल सर्प दोष से मिलती है निजात

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-अलरा गौरा गांव में मिट्टी के ऊंचे पहाड़ में स्थित है नाग देवता का मंदिर हमीरपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। मुस्करा थाना क्षेत्र के अलरा गौरा गांव में ऊंचे पहाड़ में स्थित नाग देवता के मंदिर का इतिहास करीब चार सौ साल पुराना है। यहां नागपंचमी के दिन विधि विधान से पूजा अर्चना करने से काल सर्प दोष समाप्त हो जाता है। हालांकि कोरोना के कारण यहां इस बार मेला नहीं लगेगा। मुस्करा ब्लाक क्षेत्र के अलरा गौरा गांव में मिट्टी के ऊंचे पहाड़ पर एक नाग देवता का मंदिर स्थित है। इस मंदिर का इतिहास भी कम से कम चार सौ साल पुराना है। यहां वैसे तो हर रोज गांव के लोग नाग देवता की प्रतिमा की पूजा करने जाते है लेकिन नाग पंचमी के दिन यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है। हमीरपुर और आसपास के तमाम इलाकों के लोग नाग पंचमी पर्व पर बोतल में दूध लेकर मंदिर पहुंचते है। मान्यता है कि दूध से नाग देवता की प्रतिमा का जलाभिषेक करने से मन की मुरादें पूरी होती है। साथ ही नाग देवता कभी परेशान नहीं करते है। गांव के आचार्य जगदीश तिवारी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण किसने और कब कराया ये कोई नहीं जानता है लेकिन यह सच है कि इसका इतिहास करीब चार सौ साल पुराना है। यह मंदिर मिट्टी के ऊंचे पहाड़ पर बना है जहां नाग देवता की भव्य प्रतिमा स्थापित है। उन्होंने बताया कि काल सर्प के दोष से निजात पाने के लिये श्रद्धालु हर साल नाग पंचमी की पूजा करने यहां जरूर आते हैं । बुन्देलखंड के जालौन, महोबा और पड़ोसी मध्यप्रदेश के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग नागपंचमी के दिन बड़े ही श्रद्धा भाव से मंदिर में पूजा करने आते है। सुबह से देर शाम तक यहां मेला भी लगता रहा है लेकिन अबकी बार कोरोना वायरस महामारी को लेकर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या गिनती में रहेगी। आचार्य ने बताया कि इस मंदिर की विशेषता है कि नाग पंचमी के दिन जिस किसी ने नाग देवता की प्रतिमा पर दूध चढ़ाकर माथा टेका तो उसे कभी भी सपने में सर्प नहीं दिखेंगे। यदि काल सर्प दोष भी उसके जीवन में होगा तो वह भी समाप्त हो जायेगा। उन्होंने बताया कि इस ये मंदिर पुजारी विहीन है। यहां कभी भी कोई पुजारी नही रहा है। गांव के लोग ही मिलकर नाग पंचमी की पूजा और अन्य कार्यक्रम सम्पन्न कराते है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की प्रतिमा पर सवा मन दूध भी चढ़ाया जाता है। गांव के लोगों ने बताया कि मंदिर इस समय काफी जर्जर हालत में है। इसका कुछ साल पहले जीर्णाेद्धार कराया गया था। जिसमें गांव के हर व्यक्ति ने मदद की थी। गांव में नहीं हुयी सर्पदंश से मौत मुस्करा क्षेत्र के समाजसेवी अजय गुप्ता ने बताया कि अलरा गांव में नाग देवता का मंदिर बड़ा ही चमत्कारी है। इस गांव में आज तक एक भी घटना सर्पदंश के कारण नहीं हुयी। गांव के आचार्य जगदीश तिवारी ने बताया कि दूरदराज से सर्पदंश के शिकार लोगों को लाकर नाग देवता के मंदिर में अनुष्ठान कराया जाता है। यदि समय से सर्प दंश से पीड़ित लोग मंदिर आ जाते है तो नाग देवता की प्रतिमा के सामने लिटाते ही वह ठीक भी हो जाता है। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/दीपक-hindusthansamachar.in