शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में संगीत भी औषधि : डॉ सिन्हा

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में संगीत भी औषधि : डॉ सिन्हा
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- संगीत से मानव जीवन का गहरा रिश्ता मीरजापुर, 20 जून (हि.स.)। संगीत का मानव जीवन से बहुत गहरा रिश्ता है। संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं अपितु मानसिक स्वास्थ्य का आधार है। जन्म के समय सोहर और अंतिम यात्रा पर रामधुन सब संगीत है। संगीत में ही जिंदगी संवरती है और सुर लहरियों में ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। संगीत का अपना ही मनोवैज्ञानिक असर होता है। आशावादी गीत सकारात्मकता का संचार करते हैं। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में संगीत एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जो व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रोगों व व्याधियों से मुक्ति प्रदान करता है। कमला आर्य कन्या पीजी कालेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रितू सिंह ने बताया कि शोध के पश्चात वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि संगीत के माध्यम से निकली हुई तरंगे हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संवहन करती है। संगीत सुनने मात्र से ही विचलित व्यक्ति में हर्ष के मनोभाव संवेग उत्पन्न होते हैं, जो नकारात्मक विचारों को साफ करके नई सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करती है। वर्तमान समय में जब पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रहा है, ऐसे प्रतिकूल परिस्थिति में संगीत सकारात्मक आत्मछवि का निर्माण कर जीवन को शारीरिक व मानसिक समस्याओं का सामना करने की तकनीक सिखाता है। इससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। संगीत ध्यान को स्थिर कर श्वांसों को स्थिर कर मस्तिष्क की मधुर तरंगों को उदिप्त करती है, जिससे मनुष्य का ऑक्सीजन लेवल स्थिर होता है। वर्तमान की प्रतिकूल परिस्थितियों में घर पर रहकर ही हमें अपने आप को सकारात्मक रखते हुए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना तेजी से बढ़ाने के लिए संगीत को एक औषधि के रूप में अपनाना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त

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