इमाम के साथ सलाम फेरने से मुक्तदी की पूरी हो जाएगी नमाज : मुफ्ती इकबाल कासमी

इमाम के साथ सलाम फेरने से मुक्तदी की पूरी हो जाएगी नमाज : मुफ्ती इकबाल कासमी
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— सफर में चलायमान के दौरान छोड़ी जा सकती है तरावीह कानपुर, 04 मई (हि.स.)। रमजान का पवित्र महीना तेजी के साथ अपनी आखिरी मंजिल की तरफ जा रहा है। दो अशरे गुजर चुके हैं, अब आखिरी अशरा बाकी है। इसी अशरे में कुरान शरीफ भी नाजिल हुआ था। इसी के मुताल्लिक लोगों के मन में तमाम सवाल उठते है। रब के बताए हुए तरीकों के साथ उसमें किसी तरह की कोताही न हो। रब के बनाये हुए नियमों का उल्लंघन न हो। इसी को लेकर रोजेदार शरीयत हेल्प लाइन से रोजाना सवाल पूछ रहे हैं और उनको माकूल जवाब भी मिल रहे है। इसी कड़ी में मंगलवार को कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी के जरिये अल-शरिया हेल्पलाइन से पूछे गए प्रश्नों के जवाब मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी ने इस तरह दिये। उन्होंने बताया कि इसी आखिरी अशरे में ऐतकाफ मस्नून है, ऐतकाफ का अर्थ है दुनिया के समस्त कामों को छोड़कर सिर्फ अल्लाह को राजी करने के लिये पुरूषों को मस्जिद में और औरतों को घर के किसी कोने में 10 दिन के लिये इस प्रकार वहां रहना कि, बगैर जरुरत के वहां से एक मिनट के लिए भी ना उठे। यानि आखिरी अशरा ऐतकाफ, शबे कद्र और कुरआन के नाजिल होने का अशरा है। इसीलिये इसका महत्व ज्यादा है। आखिरी अशरे में दुआ, इबादत, तस्बीह, तिलावत, नफिल आदि का खूब एहतमाम करना चाहिए। कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी कानपुर की अल-शरिया हेल्पलाइन से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर प्रश्न:-इमाम साहब के जल्दी सलाम फेरने की वजह से अगर मुक़्तदी की दरूद शरीफ रह जाये तो मुक़्तदी क्या करे? उत्तर:- दुरूद शरीफ या दुआ का कुछ हिस्सा रह जाये तो उसे छोड़ दे और इमाम की इत्तेबा में सलाम फेरे। प्रश्न:- मैं सफर में हूं, मुसाफिर पर नमाज़ माफ है तो क्या मैं तरावीह की नमाज़ छोड़ सकता हूं? उत्तर:- अगर आप किसी जगह ठहरे हुए हैं और आपके पास इतना वक़्त है कि फरायज के साथ तरावीह भी पढ़ सकते हैं तो ऐसी सूरत में आपके लिये तरावीह छोड़ना दुरूस्त नहीं होगा। प्रश्न :- रोज़े की नियत जो किताबों में लिखी है उसमें ‘‘गदन’’ यानि आइन्दा कल के रोज़े की नियत कराई जाती है, जबकि रोजा आज रखा गया है? उत्तर:-अगर आप रोजे की नियत सेहरी का वक़्त होने से पहले करते हैं तो ‘‘गदन’’ अर्थात् आइन्दा कल की नियत करेंगे क्योंकि रात गुजरने के बाद जो सुबह आ रही है उसको अरबी में ‘‘ग़दन’’ ही कहा जाता है। प्रश्न:- ऐतिकाफ करने वाला ऐतिकाफ के दौरान डाक्टर को मस्जिद में बुलाकर अपने जख्म की ड्रेसिंग करवा सकता है या नहीं ? उत्तर:- जी हां! करवा सकता है, लेकिन मस्जिद को गंदगी से बचाने का प्रयास किया जाये। हिन्दुस्थान समाचार /महमूद