सावन में चौथे सोमवार को शिव मंदिरों पर रहा पुलिस का कड़ा पहरा
सावन में चौथे सोमवार को शिव मंदिरों पर रहा पुलिस का कड़ा पहरा
उत्तर-प्रदेश

सावन में चौथे सोमवार को शिव मंदिरों पर रहा पुलिस का कड़ा पहरा

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मंदिरों के कपाट बंद होने से घट-घट में बिराजे भोले भंडारी फर्रुखाबाद, 27 जुलाई (हि.स.)। सावन के चौथे सोमवार पर शिव मंदिरों पर पुलिस का पहरा कड़ा कर दिया गया। हालांकि शिव भक्तों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना कर आत्मिक आनंद और मानसिक शांति की अनुभूति की। बताते चलें कि सावन के चौथे सोमवार पर देशभर में मशहूर पांडेश्वर नाथ मंदिर पर भक्तों की भारी भीड़ लगती थी। सोमवार के दिन यहां यातायात व्यवस्था बहाल करने में पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन इस बार कोरोनावायरस की वजह से जिला प्रशासन ने इस पौराणिक मंदिर के कपाट पूरी तरह से बंद कर दिए हैं। जिस वजह से भक्तों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव के दर्शन किए। शहर क्षेत्र के पांचाल घाट और कमालगंज थाना क्षेत्र के सिंगी रामपुर में आज के दिन गंगा भक्तों और कांवरियों का मेला लगता था। जिससे यहां के पंडा पुजारियों तथा दुकानदारों का रोजगार चलता था। इस वर्ष कोरोनावायरस की वजह से सावन के चौथे सोमवार पर भी यहां सन्नाटा छाया रहा। प्राचीन पुथरी मंदिर पर भी पुलिस का पहरा सावन के चौथे सोमवार पर कड़ा कर दिया गया। जिसकी वजह से कम संख्या में भक्तों ने अपने आराध्य देव का दर्शन व पूजन किया। चौथे सोमवार को भगवान शिव पर जलाभिषेख बेलपत्र चढ़ाना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस वजह से आखिरी सोमवार को भारी भीड़ लगती थी।हालांकि इस बार सावन के महीने में पांच सोमवार पढ़ रहे हैं। लेकिन पुलिस के पहरा की वजह से यहां भीड़ होने अब कोई गुंजाइश नहीं रह गई है। पांचाल घाट का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यहां महाभारत काल में राजा द्रुपद की पुत्री पांचाली गंगा स्नान करती थी। जिस वजह से इस घाट को पांचाल घाट नाम दिया गया। महाभारत काल से इस घाट का इतिहास जुड़े होने की वजह से यहां पर रहने वाले सैकड़ों की संख्या में पंडा पुजारियों का रोजगार चलता है। जोकि कोरोनावायरस की वजह से पूरी तरह से चौपट हो गया है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह का कहना है कि देश इस समय कोरोना से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से भीड़ पर नियंत्रण किया गया है। मंदिर में दर्शन करने या गंगा स्नान करने को किसी भी व्यक्ति को मना नहीं किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पंडित अशोक शास्त्री बताते हैं कि मंदिरों के कपाट बंद होने की खास वजह यह भी है कि कोरोनावायरस को देखते हुए भोले भंडारी ने डॉक्टरों का रूप ले दिया है। जो इस समय मंदिर में नहीं कोविड-19 अस्पतालों में रहकर लाखों लोगों की जान बचा रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों ने घरों में रहकर भगवान शंकर की पूजा अर्चना की है। और घरों में ही शिवलिंग स्थापित कर रुद्राभिषेक तथा बेलपत्र चढ़ाकर सावन के चौथे सोमवार का पर्व मनाया है। आज हर घर में हर-हर महादेव का उद्घोष गूंजता रहा। कोरोना संकट में भी भोले भक्तों की आस्था भगवान शिव के प्रथम कम नहीं हुई है। बल्कि और बढ़ गई है। लोग कोरोना संक्रमित की मृत्यु दर न के बराबर होने के लिए भगवान शंकर की कृपा मान रहे हैं। उनका कहना है कि भोले भंडारी के खुश होने पर जीवन स्वर्ग बन जाता है। और उनके कुपित होने पर व्यक्ति क्षण भर में तबाह हो जाता है। भगवान शिव हमारे देश के हर व्यक्ति की रक्षा कर रहे हैं और घट घट में व्याप्त हैं। हिन्दुस्थान समाचार/चन्द्रपाल/राजेश-hindusthansamachar.in