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उत्तर-प्रदेश

मथुरा द्वारिकाधीश मंदिर : ठाकुरजी को अर्पित अबीर और गुलाल पाने की ललक में श्रद्धालु

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- बसंत पंचमी से शुरू हो चुका है ठाकुरजी को अबीर गुलाल अर्पित करने का क्रम, जारी रहेगा 40 दिन तक मथुरा, 20 फरवरी (हि.स.)। मथुरा श्रीकृष्ण की नगरी में बसंत पंचमी से ही फाग महोत्सव मनाना शुरू हो गया है। जिले के कई मंदिरों में होली खेलने दूर-दूर से भक्त दौड़े चले आ रहे है। विश्वविख्यात ठाकुर द्वारिकाधीश मंदिर में ठाकुर जी के सामने सेवायतें अबीर और गुलाल अर्पित करते हैं, इसे भक्तों के ऊपर भी उड़ाया जाता है, जिसे भक्त प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। रंगों के त्यौहार होली की शुरुआत बृज में बसंत पंचमी 16 फरवरी से हो चुकी है। 40 दिन चलने वाले इस होली उत्सव में मंदिरों, प्राचीन देवालयों में गुलाल की होली और धमार एवं होली के पदों का गायन होने के साथ ही विश्वप्रसिद्ध बृज की होली के आयोजनों की तैयारियां बृजवासियों द्वारा जोर-शोर से की जा रही है। अब हर किसी को बृज की होली का इंतजार है। मथुरा के पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के विश्वविख्यात ठाकुर श्री द्वारकाधीश महाराज मंदिर प्रांगण में बसंत पंचमी से ही शुरू हुआ पर्व होली तक जारी रहेगा। ठाकुर जी पर अर्पित किया जाता है अबीर और गुलालठाकुर जी पर अर्पित किया जाता है अबीर और गुलाल ठाकुरजी पर अर्पित किया जाता है। रोजाना राजभोग दर्शनों के मौके पर ठाकुर जी के सामने सेवायतें अबीर और गुलाल अर्पित करते हैं, इसे भक्तों के ऊपर भी उड़ाया जाता है। मंदिर प्रवक्ता राकेश तिवारी ने बताया पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के मंदिर ठाकुर द्वारकाधीश में सभी कार्यक्रमों का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 बृजेश कुमार जी महाराज करते हैं, इन सभी कार्यक्रमों का निर्देशन मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 काकरोली युवराज डॉक्टर भागीश कुमार जी महाराज करते हैं। ठाकुर द्वारकाधीश महाराज को गुलाल लगाया जाता है, और प्रसादी गुलाल बसंत पंचमी से ही भक्तों के लिए दिया जाता है। इसका मतलब है भक्त गुलाल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं, और ये क्रम निरंतर चलता है। फाल्गुन पड़वा के दिन सुबह ठाकुर जी को ब्रज के प्रसिद्ध रसिया सुनाये जाते हैं, जो सुबह 10 से 11 बजे तक होते हैं। इस दौरान मंदिर में जो मनोरथ होंगे, उसमें कुंज एकादशी है। इसमें ठाकुर जी को बगीचे में विराजमान कर होली खिलाना होता है। इसके साथ ही ढ़ोल महोत्सव बहुत ही प्रसिद्ध मनोरथ होते हैं। देश-विदेश से आये सभी तीर्थयात्री दर्शनार्थी इन सब का आनंद लेते हैं। इस तरह होली का ये पूरा क्रम 40 दिनों तक चलता है। हिन्दुस्थान समाचार/महेश