कौशाम्बी : बारिश से उरद व मूंग बोने वाल किसानों के सपने हुए चकनाचूर

कौशाम्बी : बारिश से उरद व मूंग बोने वाल किसानों के सपने हुए चकनाचूर
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- किसानों को लागत निकालने में हो रही मुश्किल कौशाम्बी, 17 जून (हि.स.)। जनपद में द्वाबा के किसान जागती आंखों से हसीन ख्वाब देख रहे थे। शुरुआती दौर में उनकी उरद व मूंग की खेती ठीक-ठाक थी। लेकिन बीते दिनों हुई झमाझम बारिश ने किसानों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। मूंग व उरद की बरबाद होती फसल को देखकर उसके ख्वाब दम तोड़ गए। अब तो लागत निकालनी मुश्किल हो गई। बता दें कि जिले में इस वर्ष खरीफ की फसल चक्र में 1282 हेक्टेयर कर लक्ष्य रखा गया है, जबकि गत वर्ष यही लक्ष्य 913 हेक्टेयर था। इसी प्रकार पिछले साल 46 हेक्टेयर पर मूंग की बुआई का लक्ष्य था, जो पूरा हुआ। इस वर्ष भी 46 हेक्टेयर पर मूंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक किसान उरद व मूंग की खेती कर अपनी किस्मत सुधार लेता था। लेकिन इस वर्ष जिस तरह से बारिश हुई उसकी वजह से किसानों के आंखों से आंसू निकल गए। किसानों का कहना है कि बीज की लागत भी निकालनी मुश्किल हो गई। कुछ किसानों की फसल इस बरसात में ज्यादा प्रभावित नहीं हुई, लेकिन इस वर्ष मूंग की यह खेती जीविकोर्पाजन का आधार नहीं बन सकती है। किसानों के चेहरे पर छायी मायूसी इस बात का संकेत है कि वह बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है। मेड़रहा के सम्पूर्णानन्द द्विवेदी, ढेकहाई के रामबाल मौर्या व अफसार खां, बारा के रामखेलावन, मढ़ी के रामयस आदि का कहना है कि हम लोगों ने उरद व मूंग की खेती की थी। पैदावार की अच्छी उम्मीद थी, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश ने पूरी फसल चौपट कर दी। अब तो शायद लागत भी न निकल पाए। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/विद्या कान्त