आयोग की प्रामाणिकता, विश्वसनीयता बनाये रखना हम सभी का दायित्व : संजय श्रीनेत

आयोग की प्रामाणिकता, विश्वसनीयता बनाये रखना हम सभी का दायित्व : संजय श्रीनेत
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प्रयागराज, 18 मई (हि. स.)। लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक संस्था है, इसकी प्रामाणिकता, विश्वसनीयता बरकरार रखना आयोग के हर सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी का दायित्व है। संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति सत्यनिष्ठा हम सभी से अपेक्षित है। यह बातें उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने आज अपना पदभार ग्रहण करने के उपरांत आयोग के अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को दक्ष, समावेशी और संवेदनशील प्रशासन उपलब्ध कराने के लिए योग्य, सत्यनिष्ठ, प्रत्याशियों का प्रामाणिक और पारदर्शी तरीके से समयबद्ध निष्पक्ष चयन, लोक सेवा आयोग का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने आगे कहा कि लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएं मेधावी युवाओं की आकांक्षाओं का केन्द्र होती हैं, ऐसे में आयोग की चयन प्रक्रिया संदेह के परे होनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रशासकीय व्यवस्था में लोक सेवा आयोग के अतिरिक्त चयनित अधिकारियों के प्रशिक्षण संस्थान तथा सरकार का कार्मिक विभाग भी बराबर के हितधारक हैं तथा इनमें निकट का सामंजस्य स्थापित रहना चाहिए। उनके अनुसार लोक प्रशासक के चयन, लोक प्रशासन और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों तथा टेक्नॉलाजी को भी आवश्यकतानुसार लागू किया जाना प्रासंगिक है। इससे आयोग की कार्य प्रणाली में तेजी, पारदर्शिता और दक्षता आयेगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि युवाओं के शुभ स्वास्थ्य के साथ सुखद भविष्य के लिए प्रण प्रतिज्ञ है। भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रहे श्रीनेत कई संवेदनशील पदों पर नियुक्त रहे हैं। इसके पूर्व वे प्रवर्तन निदेशालय के उत्तर क्षेत्र के प्रभारी रहे, जहां वे आर्थिक अपराध से सम्बंधित अनेक गम्भीर मामलों की पड़ताल कर ख्याति अर्जित कर चुके हैं। श्रीनेत स्वयं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक हैं। उनका मानना है कि अकादमिक शिक्षा को प्रशासन से जोड़ा जाना चाहिए। शिक्षा वास्तविक अनुभवों और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। पश्चिमी देशों में ‘स्कॉलर एडमिनिस्ट्रेटर’ की प्रचलित प्रथा का संदर्भ देते हुए वे मानते हैं कि उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्य भी करते रहना चाहिए। ‘अभ्युदय योजना’ इस दिशा में एक दूरदर्शी प्रयास है, जिससे विद्यार्थियों के ज्ञान क्षितिज में विस्तार होगा। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त

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