इसरो के वैज्ञानिकों ने काशी के स्कूल बच्चों से किया वर्चुअल संवाद, बताया केन्द्र का इतिहास

इसरो के वैज्ञानिकों ने काशी के स्कूल बच्चों से किया वर्चुअल संवाद, बताया केन्द्र का इतिहास
isro-scientists-have-virtual-interaction-with-school-children-of-kashi-told-the-history-of-the-center

-कृत्रिम उपग्रहों और उसकी कार्यप्रणाली की दी जानकारी, बच्चों ने भी दिखाया उत्साह वाराणसी, 24 मार्च (हि.स.)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने बुधवार को काशी के स्कूल बच्चों संग उत्साह से संवाद किया। वैज्ञानिकों ने बच्चों के प्रश्नों का उत्तर देने के साथ अलग-अलग विषय पर जानकारी भी दी। वैज्ञानिकों ने पहले बच्चों को इसरो के इतिहास व इसके देश भर में स्थित विभिन्न 25 केन्द्रों और मुख्य अभियानों के बारे में बताया। अवलेशपुर स्थित मुनि पब्लिक स्कूल के बच्चों ने नये शैक्षणिक सत्र के पहले दिन अपने-अपने घर से ही विद्यालय प्रबंधन की पहल पर गूगल मीट से पूरे उत्साह के साथ इसरो के वैज्ञानिकों से सवाल किया। शुरुआत वरिष्ठ वैज्ञानिक एन.जे. भट्ट ने की। उनके अलावा वैज्ञानिक सचिन चौहान व अन्य लोगों ने बच्चों से बातचीत की। वैज्ञानिकों ने बच्चों को कृत्रिम उपग्रह, उसकी कार्यप्रणाली व उसके विभिन्न यंत्रो के बारे में जानकारी दी। फिर उन्हें राॅकेट, उनकी संरचना व कार्य करने की प्रणाली के विषय में चर्चा की। बच्चों ने वरिष्ठ वैज्ञानिक सतीश राव से ब्लैक होल, चन्द्रयान 2 के असफलता, राॅकेट में प्रयोग होने वाले ईधन,पृथ्वी से चन्द्रमा तथा अन्य ग्रहों तक पहुंचने में लगे समय के बारे में, प्रक्षेपण का समय भी पूछा। कई बच्चों ने आसमान में दिखने वाले टूटते तारे के बारे में सवाल पूछे, जिसका वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने धैर्य के साथ उत्तर दिया। वैज्ञानिक बच्चों के जिज्ञासा को देखकर काफी खुश थे। स्कूल संस्थापक रवि शंकर तिवारी ने इस संवाद कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से बच्चों का सर्वांगीण विकास तो होता ही है, उनमें जिज्ञासा उत्पन्न होती है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/संजय

अन्य खबरें

No stories found.