सात दिवसीय भक्ति संगीत कार्यशाला का शुभारम्भ, देश-विदेश से जुटे प्रतिभागी

सात दिवसीय भक्ति संगीत कार्यशाला का शुभारम्भ, देश-विदेश से जुटे प्रतिभागी
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लखनऊ, 07 मई (हि.स.)। लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा शुक्रवार को ऑनलाइन भक्ति संगीत कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। कार्यशाला में देश-विदेश के 85 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ संगीतज्ञ डॉ. शरदमणि त्रिपाठी के निर्देशन में आयोजित सीताराम बोल नामक यह कार्यशाला 13 मई तक प्रतिदिन गूगल मीट ऐप्प पर चलेगी। कार्यशाला का ऑनलाइन उद्घाटन करते हुए संगीत की जानकार प्रो कमला श्रीवास्तव ने कहा कि संगीत का चरमोत्कर्ष अध्यात्म संगीत ही है। भजन को सीखना-गाना सौभाग्य की बात है। प्रभु का वास कण-कण में है, इसलिए भक्ति के पदों का आह्लाद पोर-पोर तक पहुंचता है। भक्ति संगीत केवल गायन नहीं, बल्कि साक्षात प्रभु की आराधना है। कार्यशाला निर्देशक वरिष्ठ संगीतज्ञ एवं संस्कार भारती गोरक्ष प्रान्त के अध्यक्ष डॉ शरदमणि त्रिपाठी ने कहा कि आज कोरोना महामारी से जनमानस भयाक्रान्त है। ऐसी स्थिति में लोगों को निराशा व अवसाद से बाहर निकालने के उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय से मानव संगीत की अध्यात्मिक एवं मोहक शक्ति से प्रभावित होता आया है। भारतीय संस्कृति अध्यात्म प्रधान मानी जाती रही है। संगीत से अध्यात्म तथा मोक्ष की प्रप्ति के साथ भारतीय संगीत के प्राणभूत तत्व रागों द्वारा मन की शांति, योग ध्यान, मानसिक रोगों की चिकित्सा आदि विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि कार्यशाला के प्रथम दिवस राग दरबारी व कहरवा ताल में निबद्ध सीताराम सीताराम सीताराम बोल, राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम बोल भजन का अभ्यास कराया गया। कार्यशाला में आभा शुक्ला, अपर्णा सिंह, अनुराधा दीक्षित, अनुमेहा गुप्ता, अरुणा उपाध्याय, आशा श्रीवास्तव, आशा सिंह रावत, अंजलि सिंह, अम्बुज अग्रवाल, डॉ.अनु शर्मा, डॉ.कुमारी अनीता, भारती श्रीवास्तव, भावना शुक्ला, चित्रा जायसवाल, दीपक गुप्ता आदि प्रतिभागी सम्मिलित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश/विद्या कान्त