उपकल्पना शोध की दिशा को करती है निर्देशित : डॉ. एस. के. चतुर्वेदी

उपकल्पना शोध की दिशा को करती है निर्देशित : डॉ. एस. के. चतुर्वेदी
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- शोध प्राविधि संकाय विकास कार्यक्रम में चैथे दिन शोध अभिकल्प पर हुई चर्चा झांसी,07 जून (हि.स.)। पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी द्वारा आयोजित सात दिवसीय शोध प्राविधि संकाय विकास कार्यक्रम के चैथे दिन शोध अभिकल्प और उपकल्पना विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलसचिव नारायण प्रसाद व विषय विशेषज्ञ हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय श्रीनगर, गढ़वाल, उत्तराखंड के डॉ. सुधीर कुमार चतुर्वेदी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शोधपीठ के निदेशक डॉ. मुन्ना तिवारी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय कुलसचिव ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी कार्य करने से पहले हम उसकी कल्पना करते हैं कि इस कार्य का परिणाम क्या होगा। परिणाम को सोचना ही उपकल्पना होती है। कभी कभी हमारी कल्पना सही होती है कभी गलत भी हो जाती है। लेकिन बिना उपकल्पना के शोध नहीं किया जा सकता है। विषय विशेषज्ञ डॉ. एस. के. चतुर्वेदी ने शोध अभिकल्प और उपकल्पना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जहां एक ओर उपकल्पना हमें शोध की दिशा देती है वहीं दूसरी ओर शोध अभिकल्प हमें निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने का उपाय बताता है। उन्होंने कहा कि यदि शोध अभिकल्प का निर्धारण सही तरीके से कर लिया जाए तो शोध के दौरान कोई समस्या नहीं होती है और यह आसानी से किया जा सकता है। इसी प्रकार से उपकल्पना वह कथन है जिसकी सत्यता को अभी सिद्ध किया जाना है। उन्होंने कहा कि कई बार शोधार्थी अपनी उपकल्पना को सही सिद्ध करने के लिए आंकड़ों के साथ खिलवाड़ कर देते हैं. यह किसी भी स्थिति में सही नहीं होता है। इससे जो परिणाम प्राप्त होते हैं उनका कहीं भी सकारात्मक उपयोग नहीं किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित दीनदयाल शोधपीठ के निदेशक डॉ. मुन्ना तिवारी ने कहा कि यह संकाय विकास कार्यक्रम जिस उद्देश्य को लेकर शुरू किया गया था। उससे भी बहुत आगे निकल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम निश्चय ही भारत सरकार द्वारा लाई जा रही राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निर्धारित शोध को बढ़ावा देने में मददगार साबित होंगे। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने बताया कि शोध प्राविधि संकाय विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अभी तक तीन व्याख्यान आयोजित किए जा चुके हैं जिनमें एनएलआईयू भोपाल के सह आचार्य डॉ. बीरपाल सिंह, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली के आचार्य निमित चैधरी और हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय श्रीनगर, उत्तराखंड के सहायक आचार्य डॉ. एस. के. चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शित किया। आयोजन सचिव डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि आज आंकड़ा संकलन विधियों पर चर्चा की जाएगी। इस व्यख्यान में जम्मू विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. सुनील भारद्वाज विषय विशेषज्ञ एवं जे.एन.पी.जी. कॉलेज लखनऊ के सह आचार्य एवं अध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग मुख्य अतिथि के रूप में रहेंगे। आज के कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पा मिश्रा ने व आभार डॉ. शुभांगी निगम ने व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में डॉ. अनुपम व्यास, डॉ. बी. एस. मस्तैनया, डॉ. यतीन्द्र मिश्र, डॉ. ब्रजेश कुमार लोधी, डॉ. प्रशांत मिश्र, इंजी. राहुल शुक्ल उपस्थित रहे। हिन्दुस्थान समाचार/महेश