वाणिज्य कर के उच्चाधिकारी 'कैडर रिस्टक्चरिंग' के क्रियान्वयन में डाल रहे बाधा

वाणिज्य कर के उच्चाधिकारी 'कैडर रिस्टक्चरिंग' के क्रियान्वयन में डाल रहे बाधा
high-officials-of-commercial-tax-are-obstructing-the-implementation-of-39cadre-restructuring39

लखनऊ, 20 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग में 'कैडर रिस्टक्चरिंग' को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देशन में गठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट(आईआईएम, लखनऊ) की रिपोर्ट को विभाग के कुछ उच्चाधिकारी लागू करने में बाधा डाल रहे हैं। यह मुख्यमंत्री योगी की जननायक की छवि को धूमिल करने का एक षडयंत्र है। वाणिज्य कर सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजवर्द्धन सिंह, वाणिज्य कर अधिकारी संघ के अध्यक्ष कपिल देव तिवारी एवं वाणिज्य कर अधिकारी सेवा संघ के महासचिव वीरेन्द्र सिंह तथा अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय डिप्टी जनरल सेक्रेटरी सुरेश सिंह यादव ने रविवार को संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाया है। सुरेश सिंह यादव ने बताया कि आईआईएम द्वारा लखनऊ को 59 लाख रुपया जीएसटी कार्य व्यवस्था संचालन प्रोग्राम बनाने का काम दिया गया था। आईआईएम ने शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं जीएसटी के प्रचार प्रसार के लिए लाखों की प्रचार प्रसार सामग्री छपवाई गई वह भी धूल चाट रही है। उन्होंने बताया कि कैडर रिस्टक्चरिंग के क्रियान्वयन न होने से लगभग 8000 कर्मचारी बिना कार्य आवंटन के ही जीएसटी अवधि में कार्य कर रहें है। संघों की मांग है कि अविलम्ब आईआईएम लखनऊ द्वारा प्रस्तावित कैडर रिस्टक्चरिंग रिपोर्ट का क्रियान्वयन किया जाए। इसके साथ ही यह भी मांग है कि टुकडों-टुकडों में कोई भी कैडर रिस्टक्चरिंग न की जाय। अन्यथा राज्य के राजस्व में सर्वाधिक योगदान देने वाले विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक लम्बी स्टैगनेशन की प्रताड़ना झेलनी होगी। आरोप है कि उच्चाधिकारी गुपचुप तरीके से पूरे विभाग की कैडर रिस्टक्चरिंग करने के स्थान पर केवल एक या दो विंग में परिवर्तन करने जा रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा। जब केन्द्रीय कार्यालय सीजीएसटी (CGST) तथा अन्य राज्यों के एसजीएसटी(SGST) कार्यालयों में समान पद के अनुसार कैडर रिस्टक्चरिंग हुई है तो फिर उत्तर प्रदेश के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इससे वंचित क्यों किया जा रहा। संघ के पदाधिकारियों का यह भी आरोप है कि उत्तर प्रदेश के कतिपय कर चोर माफिया और विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक साजिश रच कर शासन को ऐसा प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे वाणिज्य कर विभाग के लगभग तीन हजार पद समाप्त हो जाएंगे। बताया कि करीब तीन हजार पदों को समाप्त कर सबको टैक्स ऑडिट में मर्ज करने की तैयारी है। अगर प्रस्ताव पास हुआ तो विभाग में चतुर्ण श्रेणी वाहन चालक, कनिष्ठ सहायक, वाणिज्य कर अधिकारी, स्टेनो, असिस्टेंट कमिश्नर, पल्लेदार आदि पदों की समाप्ति लगभग तय है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर चोरी रोकने और ईमानदार व्यापारियों के साथ न्याय करने के लिए वाणिज्य कर विभाग के सचल इकाई को खत्म किया जाना विभाग के लिए अहितकारी साबित होगा। ऐसे में कर चोरी करने वाले माफिया निरंकुश हो जाएगें। कर्मचारी नेता ने मुख्यमंत्री योगी से मांग की है कि पद समाप्ति और सचल इकाई के मुद्दे पर उच्च स्तरीय जांच के बाद ही कोई फैसला लिया जाए। उनकी मांग यह है कि विवादित प्रस्ताव को तत्काल निरस्त कर आईआईएम की उस रिपोर्ट को लागू किया जाए जिसके लिए सरकार 59 लाख का भुगतान कर चुकी है। श्री यादव ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा है कि अगर यह प्रस्ताव सरकार ने मान लिया तो कर चोर माफियाओं की मंशा पूरी हो जाएगी। इससे सरकार की छवि खराब होगी। हिन्दुस्थान समाचार/राजेश

अन्य खबरें

No stories found.