हैप्पी हाइपोक्सिया बना रहा युवाओं को शिकार, कोविड का नहीं चलता पता

हैप्पी हाइपोक्सिया बना रहा युवाओं को शिकार, कोविड का नहीं चलता पता
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गोरखपुर, 07 मई (हि.स.)। कोरोना की दूसरी लहर में एक ऐसी बीमारी ने युवाओं को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। जिसका आपने नाम सुना होगा। हैप्पी हाइपोक्सिया नामक इस बीमारी को साइलेन्ट किलर के रूप में जाना जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना काल की इस दूसरी लहर में केवल बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर में कोरोना से हुई मौतों में लगभग पांच प्रतिशत युवाओं को हैप्पी हाइपोक्सिया ने अपना ग्रास बनाया है। देवरिया सदर अस्पताल में तैनात सर्जन डॉ. शुभलाल शाह और फिजिशियन डॉ. मनोज जैन की मानें तो देवरिया निवासी 38 वर्षीय शिक्षक की तबियत खराब हुई थी। परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए। मरीज, संक्रमित मिला। इलाज के बाद भी हालत बिगड़ती गई। बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। जांच के बाद उसे ’हैप्पी हाइपाक्सिया’ ग्रसित पाया गया। डॉ. जैन का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाइपाक्सिया, युवाओं के लिए जानलेवा बन गई है। इसके कारण युवाओं में संक्रमण के बावजूद शुरुआत में लक्षण नहीं दिख रहे हैं। लक्षण आने के 24 से 48 घंटे के भीतर ही संक्रमित युवा की हालत बिगड़ जा रही है। उसे वेंटीलेटर पर रखना पड़ रहा है। कुशीनगर के डॉ. आफताब का कहना है हैप्पी हाइपाक्सिया मरीज में संक्रमण के मामूली लक्षण होते हैं या नहीं भी होते हैं। लेकिन उनमें ऑक्सीजन का स्तर लगातार नीचे जाता है। ऑक्सीजन का स्तर 70 से 80 फीसद से नीचे जाने पर भी कोविड का पता नहीं चल पाता। ऐसे में यह खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ता चला जाता है। यह स्थिति शरीर में कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर बढ़ाने लगती है। शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। अचानक कार्डियक अरेस्ट या ब्रेन हेमरेज के कारण जीवन की डोर थम जाती है। बीआरडी मेडिकल कालेज के टीबी एंड चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि एक सामान्य व्यक्ति का ऑक्सीजन स्तर 95 से 100 फीसद के बीच होता है। मरीज के शरीर में संक्रमण होने से उसका ऑक्सीजन स्तर गिरता है पर इसका आभास उसे नहीं होता। इसी खुशफहमी की वजह से इसे हैप्पी हाइपाक्सिया कहा जाता है। ऑक्सीजन का स्तर 70 से 80 तक पहुंचने पर भी मरीज को सांस लेने में परेशानी नहीं होती। शरीर में बढ़ती है कार्बन डाई ऑक्साइड लेबल कुशीनगर कसया के फिजीशियन डॉ. योगेश मद्धेशिया की मानें तो इसमें शरीर में ऑक्सीजन घटता है और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा होता है। ऐसे में फेफड़ों में सूजन आने पर ऑक्सीजन रक्त में नहीं मिल पाती। मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, अंग खराब होने लगते हैं। ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने पर सांस लेने में परेशानी होती है। चिकित्सकों की मानें तो हैप्पी हाइपाक्सिया से बचाव के लिए समय-समय पर शरीर के ऑक्सीजन स्तर की जांच कराएं। यही एकमात्र उपाय है। इसका प्रबंध घर पर ही कर लिया जाय तो काफी अच्छा है। वजह, ऑक्सीजन लेबल कम होने पर भी इस बीमारी में सांस की दिक्कत नहीं महसूस होने देती है। इसकी अनदेखी न करें। हिन्दुस्थान समाचार/आमोद/विद्या कान्त