अनूठी परम्परा : रामजानकी मंदिर में श्रीकृष्ण के लिये पड़ा झूला, महिलाओं ने गाये मंगल गीत
अनूठी परम्परा : रामजानकी मंदिर में श्रीकृष्ण के लिये पड़ा झूला, महिलाओं ने गाये मंगल गीत
उत्तर-प्रदेश

अनूठी परम्परा : रामजानकी मंदिर में श्रीकृष्ण के लिये पड़ा झूला, महिलाओं ने गाये मंगल गीत

news

- सावन मास के रक्षाबंधन त्यौहार तक मंदिर में चलेगा झूला महोत्सव - कोरोना संक्रमण काल में सामाजिक दूरी के बीच लोकगीतों की मची धूम पंकज मिश्रा हमीरपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। बुन्देलखंड के हमीरपुर जनपद में सुमेरपुर क्षेत्र के विदोखर गांव में कोरोना संक्रमण काल के दौरान एतिहासिक रामजानकी मंदिर में झूला महोत्सव का आगाज हो गया है। सामाजिक दूरी के बीच श्रीकृष्ण की बाल मूर्ति को झूला में रखकर इसे झुलाया जा रहा है। महिलाओं ने मंगल गीत गाकर कोरोना महामारी के खात्मा के लिये कामना भी की है। सावनी झूला महोत्सव का समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। सुमेरपुर क्षेत्र के विदोखर गांव में बद्री दास महाराज की तपो स्थली के पास रामजानकी गावती मंदिर स्थित है। ये मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। यहां भगवान राम, जानकी और लक्ष्मण के अलावा श्रीकृष्ण की बाल प्रतिमा विराजमान है। सैकड़ों साल पुरानी परम्परा में इस बार मंदिर में झूला महोत्सव का तो आगाज हो गया है लेकिन कोरोना महामारी को लेकर महोत्सव में पहले जैसे रंगत नहीं है। गांव की महिलायें और पुरुष मंदिर में अलग-अलग स्थानों पर बैठकर झूला महोत्सव में सावनी गीत गाते है। बीच-बीच में श्रीकृष्ण भगवान की बाल मूर्ति को झूला झुलाती है। यहां महिलायें और पुरुष पूरे कार्यक्रम तक सामाजिक दूरी का पालन करते है। गांव के समाजसेवी एवं विद्यालय के आचार्य मिथलेश द्विवेदी ने बताया कि गांव में रामजानकी मंदिर में झूला महोत्सव की परम्परा बहुत पुरानी है। इस महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण की बाल प्रतिमा को झूला झुलाया जाता है। हर रोज श्रीकृष्ण की मूर्ति का श्रंगार होता है फिर उन्हें झूले में बैठाया जाता है। गांव में झूला महोत्सव का माहौल ब्रज की तरह है जहां प्रेम कुछ संख्या में महिलायें ढोलक मजीरे की धुन में भक्ति और सावनी गीत गाती है। झूला महोत्सव के लिये ग्रामीणों ने दान कर दी जमीनें गांव के मिथलेश द्विवेदी ने बताया कि गांव के शंकर प्रसाद तिवारी ने कई दशक पहले झूला महोत्सव की परम्परा को आगे बढ़ाने के लिये करीब चार बीघा जमीन रामजानकी मंदिर को दान की थी। इतना हीं नहीं श्रीकृष्ण भगवान को मानने वाले बलराम सिंह ने भी पांच बीघे जमीन दान की थी। शंकर प्रसाद के पुत्र प्रत्यूष तिवारी और बलराम सिंह के पुत्र अमर सिंह हर साल रामजानकी मंदिर में सावन मास में दस दिवसीय झूला महोत्सव सम्पन्न कराते है। झूला महोत्सव प्रेम और एकता का प्रतीक है। जिसमें हर रोज भक्ति के रंग देखने को मिलते है। झूला महोत्सव के समापन के बाद मचेगी आल्हा की धूम रामजानकी मंदिर गांवती के महंत हरे राम महाराज ने बताया कि झूला महोत्सव का समापन रक्षाबंधन के दिन होगा। इसके अगले दिन दोपहर से शाम तक गांव में देवी तलैया के प्राचीन मंदिर में आल्हा गायक का परम्परागत आयोजन होगा। हालांकि कोरोना संक्रमण काल में ये सभी कार्यक्रम रस्म अदायगी के लिये सम्पन्न होंगे। महंत ने बताया कि किसी जमाने में झूला महोत्सव व आल्हा गायन कार्यक्रम में दो दर्जन गांवों के लोग यहां आते थे लेकिन अबकी बार कोरोना महामारी के खौैफ के कारण आसपास के ग्रामों के लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे है। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/मोहित-hindusthansamachar.in