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उत्तर-प्रदेश

गोरखनाथ युग प्रवर्तक महायोगी ने नई चेतना को जन्म दिया : डॉ. उदय प्रताप

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प्रयागराज, 06 फरवरी (हि.स.)। गोरखनाथ युग प्रवर्तक महायोगी थे। तत्कालीन समाज में व्याप्त बुराईयों, विसंगतियों एंव कुरीतियों को उन्होंने योग मार्ग द्वारा परिशुद्ध करने का भागीरथ प्रयास किया था। आचरण की शुद्धता और शरीर की स्वस्थता के माध्यम से पूरे समाज में उन्होंने एक नई चेतना को जन्म दिया था। उक्त विचार हिन्दुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने हिन्दुस्तानी एकेडेमी उ.प्र, प्रयागराज के तत्वावधान में शनिवार को ‘‘गुरू गोरक्षनाथ का दर्शन और उसका समाज पर प्रभाव’’ विषयक संगोष्ठी में व्यक्त किया। दिल्ली की वक्ता रूमी मलिक ने कहा कि गोरखनाथ भारतीय इतिहास धारा के एक अत्यंत तेजस्वी योगी एवं ज्ञानी थे। जिन्होंने अपने समय में फैली कुरीतियों और पाखण्ड पर अपनी रचनाओं एवं कार्यां द्वारा गहरी चोट की। गोरखनाथ योगी, दार्शनिक, धर्मनेता, पथ प्रवर्तक, हिन्दी भाषा के तत्सम प्रधान रूप के प्रथम ग्रहण करने वाले व्यक्ति थे। गोरखनाथ को प्रायः भगवान शंकर के अवतार के रूप में स्वीकार किया गया है। उनके अनुसार सिद्ध देह में जरा नहीं आती, मृत्यु का आगमन नहीं होता। बाहरी आडम्बर का वह खण्डन करते हैं। गोरखनाथ का प्रभाव भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण है। वक्ता रविनंदन सिंह ने कहा कि गोरखनाथ ने योग मार्ग को जनोन्मुखी बनाया। जो योग-समत्व योग, विपश्यना योग, शुक्ल योग जैसे विभिन्न नामों से अभिजात्य तक ही सीमित था। उसे जन-जन तक पहुँचाने का काम गोरखनाथ ने ही किया। साधना की अनेक पद्वतियों के बीच से सहज साधना को गोरखनाथ ने अत्यंत सहजता से प्रतिष्ठित किया। इस अवसर पर रामनरेश तिवारी ‘पिण्डीवासा’, डॉ.मानेन्द्र प्रताप सिंह, रविनंदन सिंह, जयकृष्ण राय, पियूष मिश्र समेत शहर के अन्य रचनाकार एवं शोध छात्र भी उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/दीपक-hindusthansamachar.in