गंगा घाट पर धार्मिक कार्य और कर्मकांड के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा : नीलकंठ तिवारी
गंगा घाट पर धार्मिक कार्य और कर्मकांड के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा : नीलकंठ तिवारी
उत्तर-प्रदेश

गंगा घाट पर धार्मिक कार्य और कर्मकांड के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा : नीलकंठ तिवारी

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वाराणसी, 23 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने गंगा घाट पर धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज को भरोसा दिया है कि घाट पर उनसे किसी प्रकार का शुल्क नही लिया जायेगा। चिंता करने की कोई बात नहीं है। गंगा घाटों पर धार्मिक आयोजन, गंगा आरती और पंडों से भी शुल्क वसूलने के नगर निगम के निर्देश के बाद लोगों में बढ़ रही नाराजगी और सोशल मीडिया पर इसके विरोध में प्रतिक्रिया देख राज्यमंत्री तिवारी ने इसे तत्काल संज्ञान में लिया। राज्य मंत्री ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल एवं नगर आयुक्त गौरांग राठी से वार्ता के बाद बयान जारी किया। राज्य मंत्री ने कहा है कि गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, उनसे कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा लोग अपनी इच्छानुसार इच्छुक हो तो रजिस्ट्रेशन कराएं, अन्यथा इसके लिए भी कोई बाध्यता नहीं होगी। गंगा घाटों पर गंगा आरती के लिए आयोजकों से सालाना तथा गंगा घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ कराने, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडो से नगर निगम द्वारा शुल्क लिए जाने की घोषणा की गयी थी। जिसे संज्ञान देते हुए राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल एवं नगर आयुक्त गौरांग राठी से फोन पर वार्ता कर इसे अव्यवहारिक बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाए जाने को कहा। राज्य मंत्री ने कहा कि काशी एक धार्मिक नगरी है, पूरी दुनिया से लोग यहां पर आकर गंगा के घाटों पर पूजन पाठ एवं धार्मिक कार्य के साथ-साथ कर्मकांड यहां के विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा कराते हैं। ऐसी स्थिति में पंडों से शुल्क लिया जाना कतई व्यवहारिक नही है। क्या है नगर निगम का आदेश वाराणसी नगर निगम ने घाटों पर सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रतिदिन चार हजार रुपये, धार्मिक आयोजन के लिए 500 रुपये प्रति दिन व सामाजिक कार्य के लिए 200 रुपये प्रति दिन लेने का निर्देश दिया है। यह शुल्क एक से 15 दिनों तक चलने वाले आयोजनों के लिए लगेंगे। इसके अलावा 15 दिन से लेकर एक साल तक चलने वाले आयोजनों पर वार्षिक शुल्क के रूप में पांच हजार रुपए लगेंगे। इसके अलावा नगर निगम गंगा और वरुणा किनारे कपड़े धोने, साबुन लगाकर नहाने पर 500 रुपये, कूड़ा कचरा फेंकने पर 2100 रुपये, घरों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से नदी में जल निकासी पर पहली बार 50 हजार रुपये व दूसरी बार 20 हजार रुपये जुर्माना वसूलेगा। विपक्षी दलों ने भी खोला मोर्चा नगर निगम के निर्देश के खिलाफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा खोल लिया है। नगर निगम के आदेश के बहाने विरोधी दल प्रदेश सरकार पर लगातार निशाना साध रहे है। इस आदेश के विरोध में समाजवादी पार्टी के पार्षदों का एक दल भी अपर नगर आयुक्त से मिला। उधर, पंडा समाज के साथ वाराणसी के संतों ने भी इस आदेश को जजिया कर बता विरोध जताया है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/दीपक-hindusthansamachar.in