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उत्तर-प्रदेश

पंचायत चुनाव में पूर्व विधायक और कमिश्नर भी, परिजन भी 'माननीय' बनने को बेताब

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रजनीश पाण्डेय रायबरेली, 05अप्रैल(हि.स.)। पंचायत चुनाव में भले ही गांव की सरकार चुनी जा रही हो, लेकिन इसमें दांव आजमाने वाले कई धुरंधर भी हैं। कोई 'माननीय' इस चुनावी समर में उतर चुका है तो किसी की पत्नी, बहु, बेटी और बेटे चुनाव लड़ रहे हैं। रायबरेली के पंचायत चुनाव में भाग्य आजमा रहे ये हाईप्रोफाइल उम्मीदवार 'माननीय' बनने को बेताब हैं। उम्मीदवारों में कोई पूर्व विधायक है तो कोई कमिश्नर, कुछ तो पूर्व सांसद और विधायकों के परिवार से हैं। पूर्व राज्यपाल के भतीजे भी इस चुनाव में कूदे हैं तो कई बड़े राजनीतिक घरानों से ताल्लुकात रखते हैं। इन उम्मीदवारों के आने से पंचायत चुनाव रोचक जरूर हो गया है, हालांकि यह दीगर बात है कि पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे इन कद्दावर उम्मीदवारों की निगाहें इससे आगे है और सभी पंचायत की मुख्य कुर्सी पर काबिज होना चाहते हैं। दरअसल, पंचायती व्यवस्था में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख दो ऐसे पद हैं जिसका रुतबा और पॉवर सबको पता है और आगे की राजनीति भी इससे प्रभावित होती है। ऐसे में कोई 'माननीय' यह मौका नहीं छोड़ना चाहता। सीट के हिसाब से वह अपनी पत्नी, बहु, बेटे और अन्य नजदीकी रिश्तेदारों को इन चुनावों में उतारता है। रायबरेली में भी इस बार पूर्व विधायक राजाराम त्यागी महराजगंज प्रथम से चुनाव लड़ रहे हैं, पूर्व सांसद अशोक सिंह की बहू आरती भी अमावां से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सेल्स टैक्स कमिश्नर रहे बृजलाल पासी भी छतोह प्रथम से भाजपा के समर्थन से चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। पूर्व विधायक रामलाल अकेला के बेटे विक्रांत अकेला भी महराजगंज प्रथम से चुनाव लड़ रहे है, इसी सीट से पूर्व विधायक श्याम सुंदर भारती की पत्नी भी चुनाव में अपना भाग्य आजमा रही है तो ऊँचाहार द्वितीय से पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के भतीजे नवलचन्द्र त्रिपाठी जो बैंक मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा बीडीसी और प्रधान पद के लिए भी इन माननीयों के परिजन भी चुनाव में उतर चुके हैं। रायबरेली की विधायक अदिति सिंह की मां वैशाली सिंह भी अमावां से चुनाव लड़ रही हैं। पंचायत चुनावों के सहारे माननीय बनने को बेताब इन कद्दावर उम्मीदवारों से चुनावों में गहमागहमी जरूर हो गई है और सभी की निगाहें इस ओर लगी हुई हैं। अगर इस चुनाव में किस्मत ने साथ दिया तो एक बार फिर ये ख़ुद या इनके परिजनों का 'माननीय' बनने का सपना जरूर पूरा हो सकेगा। हिन्दुस्थान समाचार/