फतेहपुर: मनरेगा में काम न मिलने से प्रवासी श्रमिकों के सामने दो जून की रोटी का खड़ा हुआ संकट
फतेहपुर: मनरेगा में काम न मिलने से प्रवासी श्रमिकों के सामने दो जून की रोटी का खड़ा हुआ संकट
उत्तर-प्रदेश

फतेहपुर: मनरेगा में काम न मिलने से प्रवासी श्रमिकों के सामने दो जून की रोटी का खड़ा हुआ संकट

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-जिले की 840 ग्राम पंचायतों में आए 40458 प्रवासी श्रमिक - काम की तलाश में अभी भी भटक रहे 17230 प्रवासी श्रमिक - काम न मिलने के चलते श्रमिकों को कस्बों व जिला मुख्यालय का करना पड़ रहा रुख - जिलाधिकारी की सख्ती के बावजूद जिम्मेदार मनमानी पर उतारू फतेहपुर, 02 अगस्त (हि.स.)। कोरोना संक्रमण के बाद घरों को लौटे प्रवासी श्रमिकों के सामने अब रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो रही है। गांव स्तर पर श्रमिकों को काम दिलाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। जिले के 13 विकास खंडों की 840 ग्राम पंचायतों में 291472 जॉब कार्डधारी मजदूर हैं। इनमें 40458 जॉब कार्डधारी प्रवासी मजदूर हैं लेकिन अभी 40 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें मनरेगा के तहत काम ही शुरू नहीं किया गया। 23228 मजदूरों को ही मनरेगा के तहत काम मिल सका है अभी भी 17230 मनरेगा में दर्ज प्रवासी श्रमिकों को काम की तलाश है। हालांकि जिलाधिकारी संजीव सिंह ने मनरेगा के तहत हर ग्राम पंचायत पर काम शुरु कराकर प्रवासियों को हर हाल में काम देने के निर्देश दे रखे हैं लेकिन बड़ी तादाद में प्रवासी श्रमिक अभी भी काम पाने से वंचित हैं जिसके चलते उन्हें दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। प्रवासी श्रमिक राधेश्याम कुरील ने बताया कि मनरेगा के तहत जॉब कार्ड तो बन गया है लेकिन अभी तक कोई काम नही मिला है। मजबूरी में काम की तलाश में शहर व कस्बों की तरफ रुख करना पड़ रहा है। यह हाल सिर्फ राधेश्याम का ही नहीं बल्कि हजार प्रवासी श्रमिकों की आपबीती है। जिले के ऐरायां विकासखंड में 56 ग्राम पंचायत ऐसी है जहां प्रवासी मजदूर आए हैं लेकिन अभी भी 7 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत काम ही शुरू नहीं किया गया। यहां 3854 प्रवासियों के सापेक्ष केवल 2400 श्रमिकों को ही काम दिया जा सका है। अमौली विकासखंड की 52 ग्राम पंचायतों में 2282 प्रवासी श्रमिक पंजीकृत हैं। यहां सभी श्रमिकों को काम तो दिया गया है लेकिन उतना काम नहीं मिल पा रहा है जिससे उनके घरों का चूल्हा दोनों वक्त जल सके। असोथर विकासखंड की 47 ग्राम पंचायतों में 3633 प्रवासी श्रमिक अपने वतन को लौट कर आए हैं लेकिन 2985 मजदूर ही मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। बहुआ विकास खंड की 59 ग्राम पंचायतों में 2643 प्रवासी मजदूर पंजीकृत हुए हैं इनमें अभी 13 ग्राम पंचायतें ऐसी है जहां मनरेगा के तहत काम ही नहीं हो रहा। इसी का नतीजा है कि 1503 प्रवासियों को ही यहां काम दिया जा रहा है। भिटौरा विकासखंड की 81 ग्राम पंचायतों में 3580 प्रवासी घरों को लौट कर आए हैं लेकिन 2058 श्रमिक ही मनरेगा के तहत काम पाए हैं बाकी के मजदूरों को काम की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। देवमई विकासखंड 49 ग्राम पंचायतों में 2242 श्रमिकों को पंजीकृत किया गया है जो गैर प्रांतों से वापस अपने घरों को लौटे हैं लेकिन यहां हालात बद से बदतर है। केवल 280 प्रवासी ही ऐसे हैं जिन्हें मनरेगा के तहत काम दिया जा रहा है। धाता विकासखंड के 68 ग्राम पंचायतों में 3571 प्रवासी श्रमिक दर्ज किए गए हैं इनमें 1620 श्रमिक ऐसे हैं जिन्हें मनरेगा के तहत काम दिया गया है, 2 ग्राम पंचायतों में अभी काम ही नहीं शुरू है। हस्वां विकासखंड के 58 ग्राम पंचायतों में 3587 श्रमिकों में 1940 को ही काम दिया गया है। हथगांव की 75 ग्राम पंचायतों में 3775 श्रमिक पंजीकृत किए गए हैं लेकिन 2975 प्रवासी श्रमिक ही ऐसे हैं जिन्हें मनरेगा के तहत काम दिया जा रहा है। यहां 11 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत काम ही शुरू नहीं हुआ है। खजुआ विकासखंड के 57 ग्राम पंचायतों में 3242 श्रमिक अपने वतन को लौट कर आए हैं 1451 ही काम पा रहे हैं। बाकी के प्रवासी काम न मिलने के चलते घरों में बैठने को मजबूर हैं। मलवां विकासखंड की 72 ग्राम पंचायतों में 737 पंजीकृत श्रमिकों को काम दिया जा रहा है लेकिन ना के बराबर मिल रहे काम से उनके सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। तेलियानी विकासखंड की 57 ग्राम पंचायतों में 2341 प्रवासी श्रमिक कोरोना के चलते वापस आए हैं इनमें 972 श्रमिक ही ऐसे हैं जिन्हें का काम मुहैया कराया जा रहा है। विजयीपुर विकासखंड की 64 ग्राम पंचायतों में 4971 प्रवासी श्रमिकों को पंजीकृत किया गया है इनमें 7 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां मनरेगा के तहत काम ही नहीं चल रहा। 2025 जॉब कार्डधारी श्रमिक ही ऐसे हैं जिन्हें गांव स्तर पर काम दिया गया है। पूरे जिले में 23228 प्रवासी श्रमिकों को ही अब तक काम दिया जा रहा है। 17230 प्रवासी श्रमिक ऐसे हैं जिन्हें अभी भी काम की तलाश है। ग्रामीण विकास मंत्रालय को हालिया भेजी गई रिपोर्ट में यह सामने आया है कि शासन-प्रशासन भले ही दिशा निर्देश जारी कर रहा हो लेकिन विकासखंड व ग्राम पंचायत स्तर पर मनमानी जारी है। इसी का नतीजा है कि 795 ग्राम पंचायतों में 40458 प्रवासी श्रमिक लौट कर घर आए हैं उन्हें जॉब कार्ड से आच्छादित किया गया है लेकिन 17 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक ऐसे हैं जिन्हें अभी भी काम की तलाश है। काम न मिलने के चलते श्रमिकों को गांव के बाहर कस्बा व जिला मुख्यालय तक मजदूरी की तलाश में आना पड़ता है। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने प्रवासी श्रमिकों को हर हाल में काम मुहैया कराने के लिए विभागों को निर्देश दिए हैं। खासकर मनरेगा के तहत काम करने वालों को हर हाल में काम दिए जाने को कहा है। इतना ही नहीं प्रशासन श्रमिकों को दिए जाने वाले कामों की रिपोर्ट हर दिन मांग रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/देवेन्द्र/मोहित-hindusthansamachar.in