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उत्तर-प्रदेश

इविवि : एकेडमिक काउंसिल की बैठक में शिक्षा नीति पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

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प्रयागराज, 18 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गुरुवार को कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एकेडमिक काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक लॉ फैकल्टी में हुई। इसमें विचार किया गया कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय की क्या नीति होगी ? डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोफेसर एस.आई रिजवी ने एक पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन द्वारा विजन डॉक्युमेंट प्रस्तुत किया। नई शिक्षा नीति पर आधारित होकर विश्वविद्यालय का ग्रेजुएशन कोर्स चार साल का हो जाएगा। कोर्स में इलेक्टिव विषयों द्वारा इसको सृजनात्मक बनाने की कोशिश करते हुए अंतर विषयक प्रणाली को भी जगह दी जा रही है। इसके साथ तमाम स्किल डेवलपमेंट कोर्सेज जैसे संगीत, खेल पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और क्लाइमेट चेंज भी प्रस्तावित है। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भाषाओं के कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव है। जिसमें भारतीय भाषाओं के अलावा कई विदेशी भाषाओं में भी छात्रों को पारंगत किया जाएगा। कम्प्यूटर एप्लीकेशन का भी सभी स्नातक छात्रों के लिए शुरू करने का प्रस्ताव है। एकेडमिक काउंसिल में इस बात पर भी विचार किया गया की स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स, स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स और स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट स्टडीज द्वारा इन नए कोर्स को जगह दी जाए। निर्णय लिया गया कि सभी विभाग स्नातक कोर्स इसका अपना प्रस्ताव पावर पॉइंट के जरिए आने वाली मीटिंग में प्रस्तुत करेंगे। ताकि जल्द से जल्द नए कोर्स की बारीकियां तैयार की जा सके। इसके अलावा कुछ अन्य विषय पर महत्वपूर्ण निर्णय हुए। लॉ फैकेल्टी के पांच साल लॉ कोर्स का संशोधन किया जाना तय हुआ, साथ ही जस्टिस सुधीर नारायण गोल्ड मेडल बीए एलएलबी 5 ईयर कोर्स के टॉपर के लिए और एसपी गुप्ता गोल्ड मेडल इं. एलएलबी 3 ईयर कोर्स के टॉपर इं. एलएलबी 5 ईयर कोर्स के टॉपर कांस्टीट्यूशनल लॉ विषय में एलएलबी 3 ईयर कोर्स के टॉपर और कांस्टीट्यूशनल लॉ विषय में बीए एलएलबी 5 ईयर कोर्स के टॉपर को दिए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ। एक अन्य विषय में यह निर्णय किया गया कि डीन कला संकाय प्रो. हेरम्भ चतुर्वेदी की अध्यक्षता में प्रो. शांति सुंदरम और प्रो. ए.आर सिद्दीकी की एक समिति का गठन किया जाएगा, जो अधिक से अधिक विदेशी छात्रों को यूनिवर्सिटी में आने के लिए जरूरी कदमों पर विचार करेगी। ताकि यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों की संख्या बढ़े और साथ ही विश्वविद्यालय एक अंतरराष्ट्रीय कैंपस बन सके। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/संजय-hindusthansamachar.in