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उत्तर-प्रदेश

शादी अनुदान में हुए फर्जीवाड़े की खुल रहीं बराबर परतें, जिम्मेदार बचने का खोज रहे रास्ता

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— लेखपाल से लेकर समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध कानपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। सरकारी योजनाओं व खासकर अनुदान से संबधित योजनाओं में फर्जीवाड़े को रोकना शासन के लिए सदैव चुनौतीभरा कार्य रहा है। पारदर्शिता के लिए नई—नई तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है और आनलाइन डाटा फीडिंग भी हो रही है। इसके बावजूद फर्जीवाड़ा करने वाला कोई न कोई रास्ता खोज लेते हैं। ऐसा ही मामला कानपुर में सामने आया है जहां पर मुख्यमंत्री शादी अनुदान में फर्जीवाड़े की परते बराबर खुल रही हैं। यहां तक 11 वर्षीय लड़की को भी योजना का पात्र बना दिया गया और परिजनों को जानकारी भी नहीं हुई। समाज में बेटियों का सम्मान बढ़ाने के लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री शादी अनुदान योजना संचालित हो रही है। योजना के तहत बेटी की शादी में सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है, ताकि परिजनों को शादी में होने वाले खर्च का भार कम हो सके। इस अनुदान योजना में लेखपाल की रिपोर्ट अहम होती है और संबंधित उपजिलाधिकारी समाज कल्याण विभाग को प्रार्थना पत्र अग्रसारित करते हैं। इसके बाद लाभार्थी को योजना का लाभ मिलता है, पर शादी अनुदान योजना में कानपुर में हुए फर्जीवाड़े की परतें बराबर खुल रही हैं। पहले सदर उपजिलाधिकारी के यहां से फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर से प्रार्थना पत्र को अग्रसारित किया गया, जिसका पर्दाफाश हो चुका है। अभी इस मामले की जांच ही चल रही है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा कराई गई जांच में बर्रा आठ के प्रदीप, उनकी पत्नी रजनी व श्याम नगर के ओमप्रकाश दीक्षित अपात्र पाए गए। जांच के बाद लेखपालों को निलंबित कर अपात्रों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया। एक और मामले में जांच के दौरान पाया गया कि मुंशीपुरवा निवासी किरन पत्नी राजकुमार की कोई बेटी शादी योग्य नहीं है। किरन की बेटी नव्या की उम्र 11 वर्ष है और परिजनों का कहना है कि जब बेटी शादी योग्य नहीं है तो आवेदन करने का सवाल ही नहीं है। उनकी बेटी नव्या 11 वर्ष की है। इसी तरह काहू कोठी जनरलगंज निवासी हर्ष सोनी ने बताया कि उनकी बहन नैंसी अभी अविवाहित है। ऐसे में उसकी कोई बेटी शादी योग्य कैसे हो सकती है। जबकि आवेदन पत्र में शादी के लिए योग्य लक्ष्मी सोनी को बताया गया है। इन सब मामलों को देखते हुए समाज कल्याण विभाग के अधिकारी यह मानकर चल रहे हैं कि फर्जीवाड़े में जो भी शातिर होंगे उनकी पहुंच लेखपाल से लेकर विभाग के कर्मचारियों तक होगी। वहीं सूत्र बताते हैं कि फर्जीवाड़ा सामने आने पर संबंधित जिम्मेदार अपने बचने का रास्ता खोज रहे है।। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/मोहित

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