डॉ त्रिपाठी ने सम्पूर्ण विश्व में भारतीय ज्ञान दर्शन का विस्तार किया - शंकराचार्य वासुदेवानंद

डॉ त्रिपाठी ने सम्पूर्ण विश्व में भारतीय ज्ञान दर्शन का विस्तार किया - शंकराचार्य वासुदेवानंद
dr-tripathi-expanded-the-philosophy-of-indian-knowledge-in-the-whole-world---shankaracharya-vasudevanand

प्रयागराज, 07 मई (हि.स.)। भगवान श्रीराम के कर्म क्षेत्र चित्रकूट में जन्म लेकर धर्मनगरी प्रयागराज को अपना कर्म क्षेत्र बनाने वाले डॉ. पंडित रामनरेश त्रिपाठी ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पचास वर्ष पत्रकारिता लेखन, सम्पादन एवं ज्योतिष की त्रिवेणी में गोते लगाते हुए सम्पूर्ण विश्व में भारतीय ज्ञान दर्शन का विस्तार व स्थापना किया। उनकी लेखनी, वाणी व सहज कवितत्व नई पीढ़ी को उक्त क्षेत्रों में सक्रिय एवं सफल रहने के लिए प्रेरित करता रहेगा। यह बातें श्रीमज्ज्योतिष्पिठाधीशवर जगद्गुरु शंकरचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने शुक्रवार को श्री ब्रह्मनिवास अलोपीबाग भगवान शंकराचार्य परिसर में डॉ.रामनरेश त्रिपाठी के निधन पर आयोजित शोक सभा में कहा। उन्होंने बताया कि स्व. पंडित रामनरेश त्रिपाठी ने भगवान आदिशंकराचार्य के जीवन व्रत पर महत्वपूर्ण ज्ञानवर्धक ग्रंथ सनातन समाज को दिया और अभी भी ज्योतिष्पीठ की रचना संरचना एवं गुरु परम्परा पर शोधपूर्ण लेखन की व्यस्तता उनकी दिनचर्या का प्रमुख अंश थी। किंतु इसी बीच कोरोना महामारी से ग्रसित होकर उनका दुःखद प्राणांत हो गया। जिससे मैं स्वयं एवं बुद्धिजीवी समाज दुखी है। ईश्वर से प्रार्थना है कि स्व. डॉ. रामनरेश त्रिपाठी को स्वर्ग में श्रेष्ठ स्थान दें और उनके पुत्र शशांक त्रिपाठी सहित सम्पूर्ण स्वजनों को डॉक्टर त्रिपाठी से विलग होने का दुख सहन करने की क्षमता प्रदान करें। यह जानकारी ज्योतिष्पीठ के प्रवक्ता डॉ ओंकार नाथ त्रिपाठी ने दी। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त