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उत्तर-प्रदेश

श्रद्धालुओं की संगम में डुबकी गंगा सफाई का प्रमाण-दारा सिंह चौहान

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लखनऊ, 20 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की संगम में डुबकी गंगा सफाई का प्रत्यक्ष प्रमाण है। योगी सरकार गंगा सफाई के गंभीर प्रयास कर रही है। श्री चौहान ने शनिवार को पर्यावरण व उद्योग पर आयोजित पीएचडी चेंबर के एक वेबिनार में कहा कि कानपुर में सीवेज को गंगा में गिरने से पूरी तरह रोका जाना बड़ी उपलब्धि है। यह उत्तर प्रदेश में जल प्रदूषण का एक बड़ा केंद्र माना जाता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जल और जंगल के प्रति चिंता जग ज़ाहिर है। इस संबंध में देश के एक-एक ग्राम प्रधान को उन्होंने पत्र भी लिखा है। पानी व्यर्थ न जाए इसके लिए सरकार ड्रिप इरीगेशन पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। पर्यावरण और विकास एक दूसरे के पूरक हैं। योगी सरकार ने सतत् विकास के मुद्दे पर लगातार 36 घंटे तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में चर्चा की है जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि इस वेबिनार में उद्यमियों ने अपने लिए कोई सुविधा या सब्सिडी की मांग किये बगैर पर्यावरण की चिंता की है। पीएचडी चैम्बर के नेशनल प्रेसिडेंट संजय अग्रवाल व यूपी चैप्टर के चेयरमैन ललित खेतान ने कहा कि सरकार के साथ बेहतर सामंजस्य से उद्यमी पर्यावरण संरक्षण के साथ ही देश के औद्योगिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। उन्होंने वन मंत्री चौहान के अनुरोध पर उद्योग जगत के हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के साथ एक नॉन प्रॉफिट संस्था के रूप में पीएचडी चेंबर इन सभी मुद्दों पर अपना रचनात्मक योगदान दे सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मुख्य सचिव व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के वर्तमान मेंबर डॉक्टर अनूप चंद्र पाण्डेय ने कहा कि ज़्यादातर उद्यमी पर्यावरण से सम्बंधित मानकों का पालन करना चाहते हैं। सरकार को जुर्माने की तुलना में अनुपालन की लागत को घटाना होगा। जिससे उद्यमी स्वेच्छा से इसका पालन करें। आज प्रदूषण की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है जिसके लिए सरकार व उद्योग जगत को मिलकर प्रभावी उपाय करने होंगे। कानपुर देहात के रनिया में हालात इतने भयावह हैं कि प्रदूषण के कारण भूजल के दोहन पर प्रतिबंध लगाना पड़ा है। साथ ही दूसरा पक्ष यह है कि कानपुर में 122 टेनरी बंद पड़ी हैं। यह दोनों स्थितियां ही ठीक नहीं हैं। अधिकारियों की जवाबदेही तय कर समस्या का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए। पर्यावरण और उद्योग दोनों का सुचारु रूप से चलना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। पीएचडी चेंबर के यूपी चैप्टर के चेयरमैन मनीष खेमका ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने शहरों में फिर से जंगल विकसित करने की पहल शुरू की थी। इस योजना के तहत देशभर में दो सौ नगर वन विकसित किए जाने हैं। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश को अधिक से अधिक लाभ दिलाने का प्रयास होना चाहिए। खेमका ने कहा कि यूपी फ़ॉरेस्ट कॉर्पोरेशन द्वारा उत्तर प्रदेश के जंगलों से जड़ी बूटी इकट्ठा करने का काम भी किया जाता है। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। कोरोना के कारण देश ने इसका अनुभव भी किया है। साथ ही पिछले तीन सालों में प्रदेश के इको टूरिज्म स्थलों पर लोगों के आने का सिलसिला 20 गुना तक बढ़ा है। प्रदेश सरकार की योजना है कि वनवासी क्षेत्रों में स्टे होम बनाकर ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए। इन सभी मुद्दों पर प्रभावी पॉलिसी बनाकर प्रदेश सरकार इस क्षेत्र में उद्यमियों को आकर्षित कर सकती है जिससे न केवल कारोबार बढ़ेगा बल्कि रोज़गार के अवसरों को भी बढ़ाया जा सकेगा। वेबिनार को यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी आशीष तिवारी, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर आरके सिंह व व्हील्स इंडिया लिमिटेड के जी मोहनकृष्णा ने भी संबोधित किया। हिन्दुस्थान समाचार/दीपक/संजय

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