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उत्तर-प्रदेश

सीटी स्कैन का अधिक पैसा लेने पर डायग्नोस्टिक सेंटरों पर होगी कार्रवाई

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-कमिश्नर से रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों पर रेट-बोर्ड लगवाने की मांग -शासन ने जारी किया सीटी स्कैन का शुल्क मीरजापुर, 22 मई (हि.स.)। प्रदेश सरकार ने कोविड मरीजों का सीटी स्कैन करने का शुल्क निर्धारित कर दिया है। अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने जारी आदेश में कहा है कि शासन से निर्धारित शुल्क से अधिक वसूलने की शिकायत मिलने पर सम्बंधित रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के संचालकों के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिले के लोगों ने कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्र और डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार से सभी रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों पर रेट बोर्ड लगवाने की मांग की है। महामारी के दौर में रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों पर सीटी स्कैन कराने वाले मरीजों से मनमाना पैसा वसूला जा रहा था। स्थिति यह रही कि कोविड के मरीजों का सीटी स्कैन करने पर रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक चार से पांच हजार रुपये वसूलते थे। ऐसे में सीटी स्कैन सेंटरों के संचालकों के खिलाफ प्रदेश सरकार सख्त हो गयी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार की इस व्यवस्था का उल्लंघन करने पर एपिडेमिक डिजीज ऐक्ट 1897 एवं महामारी अधिनियम 2020 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूरे प्रदेश में एचआर सीटी स्कैन की न्यूनतम फीस 2000 रुपये और अधिकतम 2500 रुपये निर्धारित किए है। यहीं नहीं, अब सीटी स्कैन मशीन की क्षमता के अनुसार फीस ली जाएगी। शासनादेश के मुताबिक 16 स्लाइस तक की मशीन से यदि सीटी स्कैन किया गया है तो दो हजार रुपये शुल्क लिया जाए। वहीं, 16 से 64 स्लाइस तक के मशीन से सीटी स्कैन करने पर 2250 और उससे अधिक क्षमता के मशीन से सीटी स्कैन करने पर 2500 रुपये शुल्क लेने का निर्देश दिया गया है। क्या है स्लाइस की स्थिति शासनादेश के मुताबिक कम स्लाइस की मशीन से एक्स-रेज ज्यादा निकलता है। जबकि अधिक क्षमता की मशीन से कम रेज निकलती है। सीएमओ कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में सभी रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों में न्यूनतम स्लाइस क्षमता की मशीन लगायी गयी है। लिहाजा यहां अधिकतम 2000 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। ढाई हजार से बढ़ाकर वसूला जाता है साढ़े चार हजार कोरोना की पहली लहर में अधिकांश सेंटर पर सीटी स्कैन कराने पर 2500 रुपये शुल्क वसूला जाता था। कुछ दिनों बाद रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के संचालक इस शुल्क को बढ़ाकर 3500 रुपये कर दिए। वहीं कोरोना की दूसरी लहर में फिर इन सेंटरों से सीटी स्कैन कराने पर 4500 रुपये वसूला जाने लगा। अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालकों से कथित चिकित्सक भी जुडे़ हुए हैं। यहीं वजह रही कि सामान्य सर्दी-बुखार में भी कुछ चिकित्सक मरीज को भयभीत कर अल्ट्रासाउंड कराने की पर्ची थमा दे रहे हैं, जबकि इसके लिए आरटीपीसीआर जांच भी करायी जा सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/गिरजा शंकर/विद्या कान्त