देवर्षि नारद जी आदर्शों पर चलकर अपने नैतिक बल को पहचानें पत्रकार : डा. एस आंबेकर

देवर्षि नारद जी आदर्शों पर चलकर अपने नैतिक बल को पहचानें पत्रकार : डा. एस आंबेकर
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देवर्षि नारद जी आदर्शों पर चलकर अपने नैतिक बल को पहचानें पत्रकार : डा. एस आंबेकर — नारद मुनि जैसे देवऋषियों की प्रेरणा से मिलता है सद्बुद्धि का मार्ग कानपुर, 27 मई (हि.स.)। पत्रकारिता समाज या राष्ट्रहित में करनी है किसी राजनैतिक विचारधारा के लिए नहीं। आज देश को अच्छे कार्यों की आवश्यकता है। संघ के स्वयंसेवक, सेवाभारती व समाज हित में कार्य कर रहे हैं अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर सेवा कार्य में जुटे हैं। देश में आज लगभग 20 करोड़ लोगों का वैक्सिनेशन हो चुका है।। पत्रकारिता का यह कर्तव्य है कि वह इन सकारात्मक पहलुओं को समाज के समक्ष लाये हमें समाज के सामने आधा सत्य नहीं बल्कि पूरा सत्य लाना है। संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी का उदाहरण देते हुए कहा कि आज हमें देवर्षि नारद जी के आदर्शों पर चलते हुए अपने नैतिक बल को पहचानना एवं समझना होगा। यह बातें नारद जी की जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान तो हमें बस सद्बुद्धि देते हैं जीवन का संघर्ष तो हमें स्वयं करना पड़ता है। आज पत्रकारिता ने व्यापक एवं विविधता पूर्ण रुप ले लिया है, जीवन के हर क्षेत्र में आज मीडिया का दखल है, तकनीकी के कारण मीडिया का क्षेत्र विस्तार हुआ है। आजादी के समय से मीडिया का महत्व है सभी आंदोलनकारी एक प्रकार के पत्रकार ही थे उनकी प्रेरणा से देश मे पत्रकारों की प्रथम पीढ़ी निष्ठावान, गुणवान, अत्यन्त प्रतिभावान, ईमानदार व किसी के समक्ष न झुकने वाली थी। आज हमारे देश मे उच्च श्रेणी के पत्रकार हैं। भगवान नारद जी का चरित्र सर्वगुण सम्पन्न है, वो ज्ञान में प्रगाण हैं फिर भी अहंकार से परे हैं, वो अपनी बीणा से हमें आनन्द देते हैं, वो अचानक से समाचार लाते हैं लेकिन साथ ही भयभीत व्यक्ति का समाधान भी करते हैं, वो लोकहित में समाचारों का आदान-प्रदान करते हैं और वो समस्त समाचार अपनी सात्विक शक्ति से प्राप्त करते हैं। इसलिये आज हमें भी पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। आज समाज में तर्क आवश्यक है लेकिन कुतर्क नहीं। हमें प्रश्न करने चाहिए, वाद-विवाद होने चाहिए लेकिन सामाजिक भेद के लिए नही वरन एक सही दिशा के लिए। इसके लिए हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। एक हाथ से नहीं बजती थाली उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार जिम्मेदार पत्रकार चाहिए उसी प्रकार पाठक भी जिम्मेदार होना चाहिए। फिल्म निर्माता के साथ ही साथ दर्शकों को भी जिम्मेदार होना चाहिए कि वो समाज को एक सही दिशा दिखाये। क्योंकि 'ताली एक हाथ से नही बजती' देवर्षि नारद जी संदेश दोनों हाथों के लिए था। हमें आज एक चरित्रवान संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है, हमें एक चरित्रवान समाज चाहिये जो अपने स्वार्थ को नियंत्रण में रख सके। इस कार्य के लिए पत्रकार जगत का महत्व और भी बढ़ जाता है। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 विनय पाठक ने कहा कि हमारा पिछले 8-10 वर्षों में पूरे विश्व के समक्ष कई क्षेत्रों में परिवर्तन हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/अजय