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उत्तर-प्रदेश

विकास कार्यों को लेकर पार्षद ने लगाया भेदभाव का आरोप, मांगी इच्छा मृत्यु

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— महापौर ने दिलाया विकास कार्य का भरोसा, नगर आयुक्त से की बात कानपुर, 28 फरवरी (हि.स.)। पुलिस और प्रशासन से पीड़ित या गंभीर बीमारी से परेशान व्यक्ति को इच्छा मृत्यु की मांग करते तो आपने सुना होगा, पर विकास कार्य को लेकर इच्छा मृत्यु मांगना अचंभित करता है। यह अचंभित करने वाला वाक्या रविवार को कानपुर नगर निगम की सदन में देखने को मिला, जहां पर पार्षद विजय लक्ष्मी यादव ने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर महापौर को इच्छा मृत्यु का पत्र सौंप दिया। हालांकि महापौर ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया और नगर आयुक्त से बात भी की। नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में इस बार सर्वसम्मति का दांव काम कर गया और तीन साल में पहली बार बिना किसी हंगामे के कार्यकारिणी चुनाव हो गयें। सर्वसम्मति के आधार पर कार्यकारिणी में भाजपा के चार, कांग्रेस और सपा के एक—एक पार्षद चुन लिए गए। इस बीच सदन में एक ऐसा वाक्या सामने आया जिससे सभी पार्षद हैरान रह गये। गांधीग्राम से पार्षद विजय लक्ष्मी यादव सदन में खड़ी होकर कहा कि महानगर के लगभग सभी वार्डों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। कुछ वार्डों में तो करोड़ों के विकास कार्य हो रहे हैं, पर मेरे वार्ड में विकास कार्य को लेकर नगर निगम प्रशासन भेदभाव करता है। जिन मतदाताओं ने नगर निगम सदन में भेजा है वह विकास कार्य को लेकर जवाब मांग रहे हैं। ऐसे में उन्हें मैं जवाब नहीं दे पा रही हूं और हताश हूं। इससे अच्छा है कि महापौर मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करें। यही नहीं पार्षद ने इच्छा मृत्यु का पत्र महापौर को थमा दिया। इस पर महापौर गंभीर हुई और नगर आयुक्त अक्षय त्रिपाठी से बातकर कहा कि आखिर कौन सा कारण है कि गांधीग्राम में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/मोहित