कोरोना के दौर में हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पूर्णतया अप्रासंगिक : रीता जोशी

कोरोना के दौर में हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पूर्णतया अप्रासंगिक : रीता जोशी
कोरोना के दौर में हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पूर्णतया अप्रासंगिक : रीता जोशी

प्रयागराज, 25 जुलाई (हि.स.)। ऑनलाइन शिक्षा के समग्र विस्तार की आवश्यकता है। कोरोना के दौर में हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पूर्णतया अप्रासंगिक हो गई है। हमारी शिक्षण संस्थाओं की परम्परागत टीचिंग 'चाक ऐंड टाक' व्यवस्था की गति रुक गई। ऑनलाइन शिक्षा 'वन वे टीचिंग' के रूप में है, जिसमें व्यापक स्तर पर सुधार की आवश्यकता है। यह बातें सांसद प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने शनिवार को समदरिया स्कूल ऑफ स्पेशल एजूकेशन द्वारा आयोजित 'सोसियो एजूकेशनल चैलेन्जेज ड्यूरिंग कोविड-19' विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज कोविड-19 की भयावहता के सामने जीवन रक्षा के उपायों की तलाश में लगी हुई है। उन्होंने चिंता व्यक्त किया कि वर्तमान में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन संकट में है। उनके परिजन धैर्य पूर्वक निगरानी रखें। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा आठ भाषाओं में चल रही अनुवाद की प्रक्रिया इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि देश में ऑनलाइन लर्निंग की दिशा में सरकार पहले से सजग रही है। स्वयंप्रभा टीवी चैनल के अंतर्गत 33 चैनल अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए पूर्व से निर्धारित हैं। वर्तमान में लोगों ने इसके महत्व को समझा और आज बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा इसके आठ भाषाओं में अनुवाद की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों की प्रत्येक कक्षा के लिए 12 चैनल जो पूर्व में डिश टीवी पर संचालित थे। उन्हें सामान्य और निःशुल्क चैनल पर लाने की पहल चल रही है। प्रो. राव ने 'स्वयं प्लेटफार्म', एक भारत एक पोर्टल, ई पाठशाला, ई मैटेरियल जैसे कई ऑनलाइन लर्निंग के उपक्रमों की चर्चा करते हुए कहा कि कोविड-19 के दौर में इनकी बड़ी आवश्यकता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से प्रो. हरी राम मिश्र ने कहा कि कोविड-19 चुनौती को एक अवसर में बदलने की जरूरत है। शिक्षकों को अपनी ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता पर सुधार लाना होगा जो 'सर्वजन हिताय' की भावना से जुड़ा हो। उन्होंने भारतीय भाषाओं की एकात्मकता और अनुसंधान की बात कही, साथ ही वामपंथी विचारकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने जो शिक्षा व्यवस्था विकसित की उसमें आध्यात्मिक पक्ष को नजरअंदाज किया। अब समय आ गया है कि शिक्षा में आध्यात्मिक पक्ष आगे लाना होगा। विशिष्ट वक्ता वैदिक विश्वविद्यालय भोपाल से प्रो. निलिम्प त्रिपाठी, श्रीलंका केलानिया विश्वविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.उपुल रंजीथ ने भी अपने विचार व्यक्त किये। वेबिनार संयोजक डॉ. मणिशंकर द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। संचालन प्राचार्य, अनन्तराम द्विवेदी पीजी कॉलेज डॉ. अम्बिका पाण्डेय तथा आभार ज्ञापन इंद्रकली पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ.मधुकराचार्य त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर प्रो. केशव मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार पी.एन द्विवेदी, प्रो. रिपुंजय भार्गव, प्रो. पी.पी दुबे, डॉ. अल्का सिंह, प्रो. सतीश मिश्र के साथ साथ देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पंजीकृत प्रतिभागियों ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त/संजय-hindusthansamachar.in

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