कोरोना प्रोटोकाल: गंगा दशहरा पर श्रद्धालु गंगा स्नान नहीं कर पाये, मायूस
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कोरोना प्रोटोकाल: गंगा दशहरा पर श्रद्धालु गंगा स्नान नहीं कर पाये, मायूस

-गंगा घाटों पर पहुंचे लोगों को पुलिस ने लौटाया, सप्ताहांत लॉकडाउन का दिया हवाला वाराणसी, 20 जून (हि.स.)। ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष की दशमी गंगा दशहरा पर रविवार को श्रद्धालु कोरोना प्रोटोकाल और साप्ताहिक लॉकडाउन के चलते गंगा स्नान नहीं कर पाये। जो किसी तरह गंगा तट पर पहुंचे भी तो पुलिस ने कोरोना काल का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया। पवित्र गंगा में डुबकी न लगा पाने पर मायूस श्रद्धालु घर वापस लौट आये। ग्रामीण अंचल में और शहरी सीमा के बाहर लोग गंगा में आस्था की डुबकी लगाते रहे। स्नान पर्व पर प्रसिद्ध दशाश्वमेधघाट पर आने वाली भीड़ की संभावना देख घाट पर पहले से ही पुलिस अफसर और जवान मुस्तैद रहे। साप्ताहिक लॉकडाउन के चलते स्नान पर्व पर लोग मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर पूजा पाठ भी नहीं कर पाये। दशाश्वमेध घाट के पास पुलिस अफसर लोगों को समझा बुझा कर वापस घर भेजते रहे। एसीपी दशाश्वमेध अवधेश पांडेय ने लोगों से कहा कि कोरोना संक्रमण काल में अपने घर में ही मां गंगा को स्मरण कर पूजा पाठ करें। कोरोना प्रोटोकाल का पालन सबके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। उधर,गंगा दशहरा पर प्रतिवर्ष अलसुबह से प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से मां गंगा की प्रतिमा का भव्य श्रृंगार कर विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच षोडशोपचार पूजन होता रहा है। मां गंगा का 51 लीटर दूध से दुग्धाभिषेक और शाम को 11 बटुक मां गंगा की महाआरती करते हैं। इसमें ऋद्धि-सिद्धि के रूप में कुआंरी कन्याएं मां गंगा को चंवर डुलाती है। गंगा सेवा निधि की ओर से भी दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती और पूजन अर्चन का कार्यक्रम होता रहा है। गंगा ट्रस्ट की ओर से ललिता घाट तथा केंद्रीय देव दीपावली महासमिति की ओर से पंचगंगा घाट, रामघाट, गाय घाट, प्रह्लाद घाट एवं भैसासुर घाट पर भी ये भव्य आयोजन होता रहा है। लेकिन कोरोना के कारण लगातार दूसरे वर्ष भी गंगा पूजन और महाआरती सभी घाटों पर सांकेतिक रूप से होगी। गौरतलब हो कि ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष की दशमी को ही गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी लोक पर अवतरित हुई। राजा भगीरथ की घोर तपस्या के बाद पृथ्वी पर पापों के शमन के लिए गंगा अपने तेज वेग से साथ आई तो भगवान शंकर ने मां गंगा को अपनी जटाओं में रोक लिया। इसके बाद राजा भगीरथ गंगा जी को अपने पीछे-पीछे अपने पूर्वजों के अस्थियों तक ले आये जिससे उनका उद्धार हो गया। भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार करके गंगा सागर में जा गिरीं और अगस्त्य मुनि द्वारा सोखे हुये समुद्र में फिर से जल भर गया। सनातन धर्म में मान्यता है कि मां गंगा के दर्शन करने से आत्म शांति मिलती है। गंगा स्नान करने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं। गगां को सनातन धर्म में साक्षात देवी का दर्जा प्राप्त है। मां गंगा के प्रति करोड़ों लोगों की आस्था है। मां गंगा जीव जन्तु व मानव प्राणी की पालन हार है। सनातनी मानते है कि मृत्यु से ठीक पूर्व गंगा जल की कुछ बूंदें मुंह में डालने से इंसान को मोक्ष मिलता है। हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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