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उत्तर-प्रदेश

एसआरएन में भर्ती कोरोना मरीजों की अब होगी और क्लोज मॉनिटरिंग : नन्दी

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- स्वरूपरानी नेहरू हॉस्पीटल को सौंपे गए आईसीयू के लिए सौ मॉनीटर प्रयागराज, 07 मई (हि.स.)। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय प्रयागराज के आईसीयू में भर्ती कोरोना मरीजों का और बेहतर ईलाज एवं क्लोज मॉनिटरिंग हो सके। इसके लिए प्रदेश सरकार ने अस्पताल प्रशासन को आईसीयू के लिए सौ और मॉनीटर दिए हैं। जिसे उत्तर प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री व विधायक नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने अस्पताल प्रशासन को सौंपा और कहा कि इससे भर्ती कोरोना मरीजों की अब क्लोज मानीटरिंग होगी। इस दौरान एसआरएन हॉस्पीटल के प्रिंसिपल डॉ. एसपी सिंह और जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी मौजूद रहे। नन्दी ने निरीक्षण करते हुए चिकित्सकों एवं अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं के बारे में जाना। वहीं कठिन परिस्थितियों में भी लगातार लोगों की सेवा कर रहे चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का उत्साहवर्धन किया। कहा कि आईसीयू में एडमिट मरीजों के क्लोज मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ती है, जिसमें यह कम्प्यूटराइज्ड मॉनीटर काफी मददगार साबित होगा। मंत्री ने कहा अब डॉक्टर के क्लोज ऑब्जर्वेशन में मरीजों का ईलाज हो सकेगा। 140 मॉनीटर पहले से थे, सौ और बढ़ाए गए हैं। ऑक्सीजन की व्यवस्थाओं और आपूर्ति के बारे में नन्दी ने डॉ. एसपी सिंह से पूछा तो उन्होंने बताया कि एसआरएन में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए दो लिक्विड टैंक लगे हैं, जिसकी क्षमता 40 हजार लीटर है। प्रतिदिन करीब 20 से 22 हजार लीटर ऑक्सीजन की खपत है। टैंक में लिक्विड की सप्लाई जमशेदपुर से होती है। दो टैंकर प्रतिदिन आते हैं। जिसकी वजह से एसआरएन में ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था लगतार बनी हुई है। ऑक्सीजन की अभी तक कोई कमी नहीं आई है। मंत्री नन्दी ने आक्सीजन आपूर्ति के लिए कैपेसिटी बढ़ाने व एक टैंकर और लगाए जाने का निर्देश दिया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि मॉनीटर के जरिये आईसीयू में एडमिट पेशेंट का एसपीओ-2 ऑक्सीजन सेचुरेशन क्या है, यह पता चलता रहेगा। उसी अनुसार डॉक्टर ऑक्सीजन का फ्लो देख सकेंगे। ऑक्सीजन लगने पर बाइपैप में है, या वेंटीलेटर पर है पूरे पैरामीटर के वाइटल मॉनीटर पर दिखते रहते हैं। पल्स रेट, ब्लड प्रेशर और ईसीजी भी डिस्प्ले करता रहता है, जिससे मॉनीटरिंग में दिक्कत नहीं होगी। मॉनीटर पर ऑक्सीजन सेचुरेशन भी शो करता है, जिससे पता चलता रहता है कि मरीज की बॉडी के वाइटल क्या हैं। यह डॉक्टर के ड्यूटी रूम से कनेक्ट रहता है। डॉक्टर ड्यूटी रूम से भी इसके जरिये मरीज के वाइटल पर नजर रख सकते हैं। सेचुरेशन फाल कम होने पर मॉनीटर में बीप बजने लगेगा। हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त