कोरोना लापरवाही : आईसीसीसी में नहीं उठ रहा फोन, सिटी मजिस्ट्रेट करें निगरानी : सीएमओ

कोरोना लापरवाही : आईसीसीसी में नहीं उठ रहा फोन, सिटी मजिस्ट्रेट करें निगरानी : सीएमओ
corona-negligence-phone-is-not-picking-up-in-iccc-city-magistrate-should-monitor-cmo

— चार बार अपडेट हो पोर्टल, पारदर्शिता के साथ मरीजों को अस्पताल में मिले बेड कानपुर, 29 अप्रैल (हि.स.)। वैश्विक महामारी कोरोना में मरीज आक्सीजन और बेड के लिए अस्पताल-अस्पताल भटक रहे हैं तो वहीं प्रशासन द्वारा दावा किया जा रहा है कि सब कुछ ठीक है। इन दावों की लगातार पोल खुल रही हैं पर कोई जिम्मेदार सुनने को तैयार नहीं है और लोग बराबर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को फोन कर रहे हैं। ऐसे में आजिज आकर गुरुवार को सीएमओ ने साफ कह दिया कि इंटीग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) अपनी जिम्मेदारियों का सही से निर्वहन नहीं करता और नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट निगरानी करें। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि मरीजों को बेड उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इंटीग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की है। वहां पर नौ डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। रामा इन्फोटेक की तरफ वहां पर लोग काम कर रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गुप्ता नोडल अधिकारी हैं। तीन लाइनें काम कर रही हैं जिनमें एक टोल फ्री नंबर 18001805159, और दो क्रमश: 05122540072, 051225456060 है। मुझे 24 घंटे काल आती हैं कि कंट्रोल रुम सेंटर का फोन नहीं उठ रहा है। ऐसे में मेरा ज्यादातर समय इन काल को उठाने में लग जाता है जिससे दूसरे काम नहीं हो पाते। सभी काल उठाना संभव नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गुप्ता से बात करेंगे। सीएमओ ने बताया कि कोविड से संबंधित जो नर्सिंग होम और मेडिकल कालेज हैं उन पर कितने बेड खाली हैं और कितने पर मरीज भर्ती हैं। यह सूचना पारदर्शिता के साथ पोर्टल पर अपलोड होनी चाहिये। 24 घंटे में चार बार पोर्टल को अपलोड होना चाहिये पर ऐसा नहीं हो रहा है जिससे लोग परेशान हो रहे हैं। कुछ शिकायतें ऐसी भी आ रही हैं कि आईसीसीसी से मरीज को भेजा गया पर अस्पताल या नर्सिंग होम लेने को तैयार नहीं है। जबकि वहां पर स्टैटिक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई है और एक अस्पताल या नर्सिंग होम में 24 घंटे में तीन स्टैटिक मजिस्ट्रेट ड्यूटी कर रहे हैं। उनका यही काम है कि जो मरीज आईसीसीसी से आये उसको अस्पताल में भर्ती कराया जाये। स्टैटिक मजिस्ट्रेट देखें कि किन कारणों से मरीज को नहीं लिया जा रहा है। यदि वहां संभव नहीं है तो आईसीसीसी को फौरन जानकारी दें। सीएमओ के बयान से सवालों के घेरे में आईं व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा बार-बार दावा किया जा रहा है कि जनपद में सब कुछ सही चल रहा है, लेकिन मरीज बार-बार अपना दर्द बयां करते हुए दम तोड़ रहे हैं। आखिरकार सीएमओ ने चुप्पी तोड़ ही दी और अपने सधे हुए बयान से यह भी संदेश दे दिया कि आईसीसीसी सफेद हाथी बन गया है। बताया तो यह भी जा रहा है कि आईसीसीसी के तीनों फोन नंबरों के रिसीवरों को कर्मचारी उठाकर अलग रख देतें हैं ताकि किसी का फोन ही न आये। ऐसे में वैश्विक महामारी से लड़ने के प्रशासन के सारे दावे फिलहाल खोखले साबित होते दिख रहे हैं। चिकित्सकों के समर्थन में आए थे सीएमओ हाल ही में आईसीसीसी की बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु गुप्ता ने रैपिड रिस्पांस टीम के प्रभारी डा. नीरज सचान की शिकायत जिलाधिकारी आलोक तिवारी से की थी। सिटी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर फौरन जिलाधिकारी ने नोडल प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश भी दिये थे। यही नहीं बैठक के दौरान ही जिलाधिकारी के साथ चलने वाली पुलिस की एस्कार्ट टीम ने हिरासत में लेकर अपनी ही गाड़ी से स्वरुप नगर कोतवाली में नोडल अधिकारी को पहुंचा दिया था। इस पर जनपद के चिकित्साधिकारियों में रोष व्याप्त हो गया था और सीएमओ भी प्रशासन की इस कार्यशैली से नाखुश दिखे। सीएमओ चिकित्साधिकारियों के समर्थन में खुद थाने पहुंचे और कई घंटों तक अधिकारियों से वार्ता कर नोडल अधिकारी को थाने से छुडवाया था। इस दौरान चिकित्साधिकारियों का कहना था कि तीन दिन पहले डा. सचान को प्रभारी बनाया गया है और संभव ही नहीं है कि जो लक्ष्य दिया गया था वह पूरा किया जा सके। हिन्दुस्थान समाचार/अजय