नाग पंचमी पर हावी रहा कोरोना का काला साया

नाग पंचमी पर हावी रहा कोरोना का काला साया
नाग पंचमी पर हावी रहा कोरोना का काला साया

- शेष नाग मन्दिर में कई गई नाग देवता की पूजा फर्रुखाबाद, 25 जुलाई (हि.स.)। शहर क्षेत्र के महाकाल मंदिर मैं नाग पंचमी पर शेषनाग मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। शिव भक्तों ने शेषनाग पर दूध चढ़ाकर एवं शिव पार्वती की पूजा कर आत्मिक आनन्द व मानसिक शांति की अनुभूति की। कोरोना वायरस की वजह सम्पूर्ण बंदी के कारण इस बार भक्तों को सामाजिक दूरी की वजह कम संख्या में ही मंदिर में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ! यहां नागपंचमी के त्योहार कोरोना का काला साया हावी रहा। हालांकि कोरोना काल मे होली से लेकर अब तक एहतिहात के चलते सीमित अंदाज में त्यौहार मनाए जा रहे हैं। घर में उत्सवों को उल्लाससे मनाने की परंपरा है। हर बार तरह इस सावन के महीने में नाग पंचमी त्योहार भी मनाया गया। पंडित अशोक शास्त्री बताते हैं कि भविष्य पुराण में इस बात का जिक्र किया गया है कि इस दिन नाग पूजा और नागों को दूध चढ़ाने से नाग देवता खुश हो जाते हैं। इससे सर्पदंश का खतरा भी कम होता है। माना जाता है की महाराज जनमेजय ने एक बार नाग यज्ञ किया था,जिस के कारण नाग शरीर जल गया था। तब आस्तिक मुनि ने उनके सर पर दूध डालकर उनकी रक्षा की थी। पंचमी की पूजा का संबंध धन से जुड़ा हुआ है। दरअसल, शास्त्रों में ऐसा माना जाता है कि नाग देव गुप्त धन की रक्षा करते हैं। इस कारण ही नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने से जीवन में धन-समृद्धि का भी आगमन होता है। इस दिन व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष होता है। उसे इस दोष से बचने के लिए नाग पंचमी का व्रत करने की सलाह दी जाती है। हल्दी, षूप, दीप से नाग का देवता का पूजन किया गया। ग्रामीण क्षेत्रो में महिलाओं दीवारों पर मक्खन से नाग बना कर पूजा अर्चना की। कोरोना की वजह से चल रहे बीकेण्ड बंदी की वजह से इस बार हर साल की तरह प्रतियोगिताओं का आयोजन नही हो सका। लोग सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए खेतों से मिट्टी लाये। इस मिट्टी में भुजरियां बोई गई। जिनको रक्षा बंधन के दिन बहते पानी मे विसर्जित किया जएगा। हिन्दुस्थान समाचार/चन्द्रपाल/मोहित-hindusthansamachar.in

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