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उत्तर-प्रदेश

जब कोर्ट ने किया इंकार तो सिटी मजिस्ट्रेट ने दे दी राहत

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हाईकोर्ट नाराज, सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को किया निलम्बित प्रयागराज, 03 अप्रैल (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि विवाद में सिविल कोर्ट के राहत देने से इंकार के बाद वही राहत सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा देने पर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट ने सिविल कोर्ट को ओवर राइड किया है। जो राहत देने से सिविल जज से इंकार कर दिया वही राहत सिटी मजिस्ट्रेट ने दे दी। कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को निलम्बित कर पक्षों से जवाब मांगा है और सुनवाई के लिए 5 अप्रैल की तारीख नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने सुरेश कुमार व अन्य की पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। कोर्ट ने छुट्टी में याचिका की सुनवाई कर राहत दी। हाईकोर्ट ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट ने सिविल कोर्ट के आदेश के ऊपर बैठ कर भू स्वामी को अपनी ही जमीन पर निर्माण करने से रोक दिया है। मालूम हो कि याचीगण ने जमीन खरीदी और नगर निगम मे नाम भी दर्ज करा लिया। जब वे मकान बनाने लगे, तो विपक्षियों ने विरोध किया और सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रयागराज के समक्ष निषेधात्मक वाद दायर किया। सिविल कोर्ट ने याचीगण को नोटिस जारी कर 25 जनवरी 21त क जवाब मांगा, किन्तु निषेधात्मक आदेश जारी नहीं किया। सिविल वाद में विवादित भूमि यथास्थिति बनाये रखने की मांग भी नहीं मानी गयी। सिविल कोर्ट से निराश विपक्षियों की पहल पर करेली थाना पुलिस ने शांति भंग के अंदेशे पर 25 जनवरी को चालान रिपोर्ट भेजी। उस पर 30 जनवरी को नोटिस जारी हुई और तहसीलदार से रिपोर्ट भी मांगी गयी। इसके बाद विपक्षियों ने 4 फरवरी को धारा 145 सीआरपीसी की अर्जी दी। इसके दूसरे दिन 5 फरवरी को सिटी मजिस्ट्रेट ने जमीन की नवैयत बदलने पर रोक लगा दी और होली की छुट्टी से ठीक पहले 25 मार्च को एसएचओ करेली को निर्माण रोक कर 8 अप्रैल को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को निलम्बित कर आदेश की प्रति जिलाधिकारी के मार्फत सिटी मजिस्ट्रेट व एसएसपी के मार्फत एसएचओ करेली को तत्काल भेजने का निर्देश दिया है और उनसे जानकारी मांगी है। मुकदमे की सुनवाई 5 अप्रैल को होगी। हिन्दुस्थान समाचार/आर.एन